चांदी के गिलास में पानी पीने का बढ़ता चलन: आयुर्वेद और विज्ञान भी मानते हैं फायदेमंद

नई दिल्ली: पुराने समय में राजा-महाराजा और धनवान लोग सोने-चांदी के बर्तनों का इस्तेमाल किया करते थे। लेकिन आज भी यह परंपरा जीवित है और कई लोग चांदी के गिलास में पानी पीना पसंद करते हैं। आम लोगों से लेकर कई सेलिब्रिटीज तक, अपनी दिनचर्या में इसे शामिल कर रहे हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, चांदी के गिलास में पानी पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और पाचन तंत्र मजबूत होता है। इसके अलावा, यह चंद्रमा की शीतलता प्रदान करता है, जिससे शरीर में ठंडक बनी रहती है और पित्त संबंधी समस्याओं से राहत मिलती है।

आधुनिक विज्ञान भी इस परंपरा को सही ठहराता है। विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी में प्राकृतिक रूप से एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो पानी को शुद्ध करने में मदद करते हैं और हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करते हैं। यही कारण है कि आज भी लोग चांदी के बर्तनों का उपयोग करने की आदत बनाए हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सही मात्रा में चांदी का उपयोग किया जाए, तो यह शरीर के लिए लाभदायक हो सकता है। इसलिए पारंपरिक तरीकों को अपनाते हुए आधुनिक विज्ञान की राय को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

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Author: Arpa News 36

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