रायपुर में वक्फ बोर्ड का बड़ा दावा: मालवीय रोड और हलवाई लाइन की 40 दुकानों पर बताया अवैध कब्जा, दुकानदारों में मचा हड़कंप

रायपुर। रायपुर शहर के दिल कहे जाने वाले पॉश इलाकों में अब एक ज़मीन विवाद तूल पकड़ रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने शहर के मालवीय रोड और हलवाई लाइन इलाके की करीब 40 दुकानों पर अपना मालिकाना हक जताते हुए दावा ठोका है। वक्फ बोर्ड का कहना है कि ये सारी संपत्तियां वक्फ की हैं, जिन पर वर्तमान दुकानदारों ने फर्जी रजिस्ट्री के ज़रिए कब्जा कर लिया है।

क्या है मामला?

वक्फ बोर्ड के अनुसार, ये सभी दुकानें पहले वक्फ संपत्ति के तहत थीं और जिन लोगों के पास ये दुकानें हैं, वे पहले महज किराएदार थे। लेकिन धीरे-धीरे, इन दुकानदारों ने खुद को मालिक घोषित कर दिया, और प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री अपने नाम करवा ली। बोर्ड का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में आज भी ये दुकानें वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज हैं, इसलिए वर्तमान रजिस्ट्री अवैध और अमान्य है।

वक्फ बोर्ड ने इस पूरे मामले को लेकर रायपुर कलेक्टर और एसएसपी को पत्र लिखा है, जिसमें इन दुकानों की रजिस्ट्री को शून्य घोषित करने और संपत्ति को दोबारा वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज करने की मांग की गई है। साथ ही, सभी 40 दुकानदारों को कानूनी नोटिस भी भेजा गया है।


बोर्ड के पास हैं पुराने दस्तावेज

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने ‘छत्तीसगढ़’ से खास बातचीत में बताया कि वक्फ बोर्ड के पास इन संपत्तियों के पुराने किरायानामे और दस्तावेज मौजूद हैं, जो साफ तौर पर दर्शाते हैं कि ये दुकानें वक्फ की रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इनकी रजिस्ट्री करवाई गई, जिसे अब कानूनी रूप से निरस्त कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है।


दुकानदारों का पक्ष: “हम मालिक हैं, वक्फ बोर्ड का दावा गलत”

हालांकि दूसरी ओर, जिन दुकानदारों को नोटिस भेजा गया है, उन्होंने वक्फ बोर्ड के दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
लक्ष्मी इलेक्ट्रॉनिक्स के संचालक अर्जुनदास वासवानी ने ‘छत्तीसगढ़’ से बात करते हुए बताया कि वो पहले किराएदार जरूर थे, लेकिन 1982 में मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड से यह संपत्ति विधिवत रूप से रिलीज हो गई थी। उन्होंने कहा कि संपत्ति को वक्फ करने वाले परिवार के 36 सदस्यों ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद उन्होंने वैध रजिस्ट्री करवाई।

वासवानी ने यह भी बताया कि उन्हें जो नोटिस मिला है, उसका कानूनी जवाब वकील के माध्यम से भेज दिया गया है, और साथ में वे सारे दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं जो यह साबित करते हैं कि वह अब कानूनी मालिक हैं।


प्रशासन कर रहा है दस्तावेजों की जांच

सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल प्रशासन वक्फ बोर्ड द्वारा दिए गए दस्तावेजों की जांच कर रहा है। क्योंकि मामला संपत्ति का है और कानूनी दस्तावेजों की बात है, इसलिए जांच पूरी होने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जा सकेगा।

इस बीच, जिन दुकानदारों को नोटिस मिला है, वे भी अपने-अपने दस्तावेज इकट्ठा कर जवाब तैयार कर रहे हैं।


क्यों है यह मामला अहम?

रायपुर के मालवीय रोड और हलवाई लाइन शहर के सबसे पुराने और व्यापारिक रूप से अहम इलाके हैं। यहां की संपत्तियों की कीमत आज करोड़ों में है। अगर वक्फ बोर्ड का दावा सही साबित होता है, तो यह मामला पूरे राज्य में एक नज़ीर बन सकता है, क्योंकि कई अन्य वक्फ संपत्तियों पर भी इसी तरह के दावे हो सकते हैं।


क्या है वक्फ संपत्ति विवाद का राष्ट्रीय संदर्भ?

गौरतलब है कि देशभर में वक्फ संपत्तियों को लेकर विवाद बढ़ते जा रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और पहचान को लेकर कानून भी बनाए गए हैं। इन हालात में राज्य वक्फ बोर्ड भी सक्रिय हो गया है और छत्तीसगढ़ में पुराने रिकॉर्ड की छानबीन कर रहा है।


नतीजा क्या होगा?

फिलहाल यह मामला जांच और कानूनी प्रक्रिया के अधीन है, लेकिन इसने व्यापारियों के बीच बेचैनी और असमंजस जरूर पैदा कर दी है। आने वाले हफ्तों में यह विवाद नए मोड़ ले सकता है, और कोर्ट की दहलीज़ तक भी पहुंच सकता है।

Arpa News 36
Author: Arpa News 36

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