सीमाओं से परे आत्मिक उड़ान: बसंत को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार, कला साधना बनी प्रेरणा

कुरूद : कलाकार बसंत की प्रेरणादायक यात्रा आज पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। बसंत का राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना न केवल व्यक्तिगत सम्मान है, बल्कि साधना, विश्वास, तपस्या और परिवार के अटूट सहयोग का प्रतीक भी है। उनके अनुसार, जब कर्म समर्पण बन जाता है और सीमाओं को साधना जीवन का हिस्सा बन जाती है, तो पुरस्कार नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। यही वजह है कि बसंत का राष्ट्रीय पुरस्कार आज पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन गया है।

कर्म, समर्पण और आध्यात्मिक दृष्टि

बसंत कहते हैं कि जीवन ने उन्हें सिखाया कि शरीर सीमित हो सकता है, मगर आत्मा की उड़ान अनंत होती है। यही अनंत उड़ान उनकी हर रचना में झलकती है। उनकी कला सिर्फ रंगों का खेल नहीं, बल्कि आत्मा की गहराइयों से निकली अनुभूति है।
बसंत स्वीकार करते हैं कि बसंत का राष्ट्रीय पुरस्कार वास्तव में उनकी माँ की तपस्या, रंगों के प्रति उनका विश्वास और लोगों के स्नेह का परिणाम है।

परिवार और समाज का समर्थन—साहू परिवार को चारों ओर से बधाइयाँ

इस उपलब्धि के बाद साहू परिवार को पूरे क्षेत्र से बधाइयाँ मिल रही हैं। बसंत की सफलता ने न केवल उनके परिवार का नाम रोशन किया है, बल्कि क्षेत्र के युवाओं को भी प्रेरित किया है कि सीमाएँ चाहे कितनी भी हों, संकल्प और साधना के साथ उन्हें पार किया जा सकता है।
यह सम्मान इसलिए भी विशेष है क्योंकि बसंत का राष्ट्रीय पुरस्कार उन कलाकारों के लिए एक संदेश है जो संघर्ष के बावजूद अपनी कला को जीवित रखते हैं।

बसंत की कला—अनुभूति से अभिव्यक्ति तक
रंगों में जीवन की धड़कन

बसंत की कला का सबसे बड़ा आकर्षण है उसमें छिपा जीवन का यथार्थ। वे मानते हैं कि कला केवल देखने की चीज नहीं, बल्कि महसूस करने की प्रक्रिया है।

सीमाओं के भीतर से अनंत की यात्रा

बसंत शारीरिक सीमाओं का उल्लेख करते हुए कहते हैं—शरीर सीमित है, लेकिन आत्मा की उड़ान अनंत। यह विचार उनकी पेंटिंग्स, स्केच और अन्य कलात्मक अभिव्यक्तियों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

उनकी रचनाएँ उसी अनंत उड़ान का विस्तार हैं, जिन्हें देखकर दर्शक भावनाओं की एक नई दुनिया में प्रवेश करते हैं। यही वजह है कि बसंत का राष्ट्रीय पुरस्कार उनकी कला के मूल्य को और बढ़ाता है।

आंतरिक प्रेरणा और आध्यात्मिक साधना

बसंत का मानना है कि कला साधना का एक रूप है। जब कोई व्यक्ति निरंतर अभ्यास, ध्यान और समर्पण के साथ किसी रचना में खुद को ढालता है, तो वह कला साधना बन जाती है। बसंत के लिए कला सिर्फ करियर नहीं, बल्कि जीवन का मार्ग है।
इसलिए बसंत का राष्ट्रीय पुरस्कार उनके लिए केवल ट्रॉफी नहीं, बल्कि साधना का फल है।

बसंत की प्रेरणादायक यात्रा, उनका समर्पण, उनकी माँ की तपस्या और समाज का स्नेह—ये सभी उनकी सफलता के आधार हैं। बसंत का राष्ट्रीय पुरस्कार न केवल उनकी कला की श्रेष्ठता को सिद्ध करता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि आत्मा की उड़ान को कोई सीमित नहीं कर सकता। संकल्प और साधना से हर लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है, और यही इस पुरस्कार का सच्चा अर्थ है।

 

Bharti Sahu
Author: Bharti Sahu

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