तसर रेशम क्लस्टर नगरी धमतरी: ग्रामीण महिलाओं और किसानों के लिए आत्मनिर्भरता की नई राह

धमतरी | धमतरी जिले के नगरी विकासखंड में तसर रेशम क्लस्टर नगरी धमतरी को लेकर जिला प्रशासन द्वारा एक अभिनव और दूरदर्शी पहल की जा रही है। यह पहल अब केवल एक सरकारी योजना नहीं रह गई है, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी समुदायों के लिए स्थायी आजीविका का भरोसेमंद साधन बनती जा रही है। केंद्र सरकार को भेजा गया प्रस्ताव अंतिम स्वीकृति की प्रक्रिया में है और इसके अनुमोदन के बाद नगरी क्षेत्र तसर रेशम उत्पादन की एक नई पहचान स्थापित करेगा।

ग्रामीण विकास की दिशा में बड़ा कदम

तसर रेशम क्लस्टर नगरी धमतरी का उद्देश्य स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। तसर रेशम उत्पादन ऐसा क्षेत्र है, जिसमें कम लागत में अधिक लाभ की संभावना होती है। इस योजना के माध्यम से महिलाओं, किसानों और युवाओं को दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है।

यह पहल “आत्मनिर्भर भारत” और “आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़” की सोच को जमीनी स्तर पर साकार करने का प्रयास है।

महिलाओं के हाथों में आत्मनिर्भरता की डोर

तसर रेशम क्लस्टर नगरी धमतरी की सबसे बड़ी ताकत है महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण। प्रारंभिक चरण में 20 महिलाओं को तसर कोसा से धागा बनाने के लिए बुनियाद रीलिंग और विद्युत चालित स्पिनिंग मशीनों का प्रशिक्षण दिया गया है।

आने वाले चरण में चार अन्य गांवों की 20 महिलाओं को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद महिलाएं अपने घरों में ही रेशम धागा तैयार कर रही हैं, जिससे वे आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

घर बैठे रोजगार, रोज बढ़ती आमदनी

खोज संस्थान की प्रतिनिधि श्रीमती सावित्री यादव के अनुसार, तसर रेशम क्लस्टर नगरी धमतरी से जुड़ी महिलाएं अब प्रतिदिन ₹200 से ₹250 तक की अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं।

स्थानीय महिला भुनेश्वरी बताती हैं कि कोसा को सोडा और साबुन के मिश्रण में उबालकर मशीनों से महीन धागा तैयार किया जाता है, जिसकी बाजार में अच्छी मांग है। यह कार्य कम संसाधनों में सम्मानजनक आमदनी का जरिया बन रहा है और महिलाओं को आत्मविश्वास भी दे रहा है।

किसानों के लिए आय का नया विकल्प

इस रेशम क्लस्टर का लाभ केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है। तसर रेशम क्लस्टर नगरी धमतरी के अंतर्गत किसान अपने खेतों में शहतूत के पौधे लगाकर कोसा पालन कर सकेंगे। इससे उनकी पारंपरिक कृषि आय के साथ-साथ एक अतिरिक्त आय स्रोत भी विकसित होगा।

प्रारंभिक चरण में 40 किसानों ने इस योजना से जुड़ने की सहमति दी है। जिला प्रशासन द्वारा उन्हें आधुनिक रेशम उत्पादन तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में वृद्धि हो सके।

प्रशासन की सोच: आत्मनिर्भर गांव

कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि रेशम उद्योग ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम है। तसर उत्पादन में कम निवेश के साथ बेहतर लाभ संभव है। यह योजना महिलाओं और बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार का प्रभावी साधन बनेगी।

प्रशासन का लक्ष्य है कि तसर रेशम क्लस्टर नगरी धमतरी के माध्यम से हर ग्रामीण परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए।

आत्मनिर्भर धमतरी की ओर ठोस पहल

धमतरी जिला प्रशासन इस क्लस्टर के माध्यम से प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग, विपणन व्यवस्था और बाजार से सीधा जुड़ाव सुनिश्चित करेगा। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ जिले को रेशम उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगी।

तसर रेशम क्लस्टर नगरी धमतरी ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। सही नीति, प्रशिक्षण और प्रशासनिक सहयोग के साथ यह पहल “आत्मनिर्भर धमतरी” के संकल्प को साकार करती दिखाई दे रही है। आने वाले समय में तसर रेशम क्लस्टर नगरी धमतरी जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनने की पूरी क्षमता रखता है।

 

Bharti Sahu
Author: Bharti Sahu

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