ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने को लेकर भारतीय चुनाव आयोग मंगलवार को बड़ा कदम उठाने जा रहा है। विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के बाद मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल और अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित की जाएगी। इस प्रक्रिया में सामने आए शुरुआती आंकड़ों ने मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।
चुनाव आयोग से जुड़े आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने पर मध्य प्रदेश में लगभग 41.8 लाख वोटरों के नाम हटाए जा सकते हैं, जो कुल वोटरों का करीब 7.2 प्रतिशत है। हालांकि, यह आंकड़ा अंतिम नहीं है और वास्तविक स्थिति का पता अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद ही चलेगा।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान का उद्देश्य
विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन करना है। चुनाव आयोग का कहना है कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी करने से पहले मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान करना जरूरी था ताकि चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।
इस अभियान की शुरुआत 4 नवंबर को हुई थी और डेढ़ महीने से अधिक समय तक यह प्रक्रिया चली।
41.8 लाख नाम क्यों हटाए जा सकते हैं?
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जिन 41.8 लाख वोटरों के नाम हटाए जाने का अनुमान है, उनके पीछे कई कारण सामने आए हैं:
हटाए जाने वाले नामों का प्रारंभिक वर्गीकरण
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8.4 लाख वोटर मृत पाए गए
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8.4 लाख वोटर अनुपस्थित पाए गए
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22.5 लाख वोटर दूसरे स्थानों पर स्थानांतरित हो चुके थे
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2.5 लाख वोटर एक से अधिक पतों पर रजिस्टर्ड पाए गए
इन कारणों के चलते ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने से पहले बड़ी संख्या में नामों को हटाने का प्रस्ताव रखा गया है।
बड़े शहरों में कितने नाम हट सकते हैं?
मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों में यह असर ज्यादा देखने को मिल सकता है।
शहरवार अनुमानित आंकड़े
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भोपाल: 21.25 लाख वोटरों में से 4.3 लाख (20.23%) नाम हट सकते हैं
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इंदौर: 28.67 लाख में से 4.4 लाख नाम
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ग्वालियर: 16.49 लाख में से 2.5 लाख नाम
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जबलपुर: 19.25 लाख में से 2.4 लाख नाम
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने पर ये सभी आंकड़े केवल प्रारंभिक अनुमान माने जाएंगे।
65,000 से ज्यादा BLO ने घर-घर जाकर किया सत्यापन
विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान 65,000 से ज्यादा बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को मतदाता सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
इन अधिकारियों ने शहरों, कस्बों और गांवों में घर-घर जाकर वोटरों की जानकारी की पुष्टि की।
गौरतलब है कि वर्ष 2023 में मध्य प्रदेश में 6.65 करोड़ से ज्यादा मतदाता रजिस्टर्ड थे। राज्य में कुल 230 विधानसभा सीटें और 29 लोकसभा क्षेत्र हैं।
कांग्रेस का विरोध और चुनाव आयोग पर आरोप
पूरे अभियान के दौरान राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि SIR अभियान में कई अनियमितताएं हुई हैं।
कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल मिला CEO से
भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव अधिकारी से मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराई और मांग की कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने से पहले सभी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाए।
चुनाव आयोग का पक्ष
चुनाव आयोग का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया संविधान और चुनाव नियमों के तहत की जा रही है। आम नागरिकों को ड्राफ्ट सूची पर आपत्ति दर्ज कराने और सुधार कराने का पूरा अवसर दिया जाएगा।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद मध्य प्रदेश में मतदाता सूची की तस्वीर काफी हद तक बदल सकती है। जहां चुनाव आयोग इसे मतदाता सूची को शुद्ध करने की प्रक्रिया बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा मान रहा है। अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने का असर आने वाले चुनावों पर कितना पड़ता है।







