कुरुद अधिवक्ता संघ बहिष्कार समाप्त, 43 दिनों बाद मिली राहत
कुरुद अधिवक्ता संघ बहिष्कार समाप्त होने से कुरुद अनुविभाग के हजारों किसानों और आम नागरिकों को बड़ी राहत मिली है। पिछले डेढ़ महीने से भखारा, मगरलोड और कुरुद तहसील के राजस्व न्यायालयों का कामकाज पूरी तरह ठप था। राजस्व मंत्री और राजस्व सचिव से हुई अहम मुलाकात के बाद मिले आश्वासन के पश्चात अधिवक्ता संघ ने अनिश्चितकालीन बहिष्कार समाप्त करने का निर्णय लिया।
इस फैसले के बाद अब राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की सुनवाई फिर से शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
11 नवंबर से चल रहा था अनिश्चितकालीन बहिष्कार
जानकारी के अनुसार, कुरुद अनुविभाग की तीनों तहसीलों—भखारा, मगरलोड और कुरुद—के राजस्व न्यायालयों में लंबे समय से अनियमितता और भ्रष्टाचार को लेकर अधिवक्ताओं में नाराजगी थी। शिकायतें किए जाने के बावजूद जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तब अधिवक्ता संघ ने 11 नवंबर से अनिश्चितकालीन बहिष्कार शुरू कर दिया।
इस बहिष्कार के चलते नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और अन्य राजस्व प्रकरण पूरी तरह प्रभावित हो गए थे। कुरुद अधिवक्ता संघ बहिष्कार समाप्त होने तक 43 दिनों तक न्यायिक कार्य ठप रहा।
कलेक्टर स्तर पर हुई चर्चा रही बेनतीजा
बहिष्कार के दौरान कलेक्टर और संबंधित राजस्व अधिकारियों के साथ कई दौर की चर्चाएं हुईं, लेकिन अधिवक्ताओं की प्रमुख मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका। इससे अधिवक्ताओं की नाराजगी और बढ़ती चली गई।
स्थिति बिगड़ती देख अधिवक्ता संघ ने सीधे राज्य स्तर पर अपनी बात रखने का निर्णय लिया।
राजस्व मंत्री और सचिव से मुलाकात बनी निर्णायक
अधिवक्ता संघ के प्रतिनिधियों ने राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा और राजस्व सचिव रीना बाबा साहेब से मुलाकात कर राजस्व न्यायालयों में व्याप्त समस्याओं को विस्तार से रखा। संघ ने न्यायालयों में पारदर्शिता, निष्पक्ष कार्यवाही और अधिकारियों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग की।
मंत्री और सचिव ने संघ की कुछ मांगों को तत्काल पूरा करने और शेष मांगों को शीघ्र पूरा करने का आश्वासन दिया। इसी आश्वासन के बाद कुरुद अधिवक्ता संघ बहिष्कार समाप्त करने का फैसला लिया गया।
जनता और किसानों के हित में था आंदोलन
अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष रमेश पाण्डेय ने बताया कि यह बहिष्कार किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि जनता और किसानों के हित में किया गया था। उन्होंने कहा कि राजस्व न्यायालयों का कार्य निष्पक्ष न होकर प्रभावशाली लोगों के नियंत्रण में चला गया था।
मनमानी के खिलाफ एकजुट संघर्ष
उन्होंने कहा कि अधिकारियों की मनमानी और भ्रष्ट कार्यप्रणाली के खिलाफ अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर संघर्ष किया। अधिवक्ताओं की एकता, निडरता और सतत प्रयासों का ही परिणाम है कि आज कुरुद अधिवक्ता संघ बहिष्कार समाप्त हुआ और शासन-प्रशासन को उनकी बात सुननी पड़ी।
न्यायालयों के खुलने से आम लोगों को राहत
बहिष्कार समाप्त होने के बाद अब राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों की सुनवाई शुरू होगी। इससे किसानों, जमीन विवाद से जुड़े पक्षकारों और आम नागरिकों को राहत मिलेगी, जो पिछले 43 दिनों से न्यायालयों के चक्कर काट रहे थे।
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि अब न्यायालयों में पारदर्शी और समयबद्ध कार्यवाही देखने को मिलेगी।
राजस्व मंत्री और सचिव के आश्वासन के बाद कुरुद अधिवक्ता संघ बहिष्कार समाप्त होना एक सकारात्मक संकेत है। इससे न केवल न्यायालयों का कामकाज सामान्य होगा, बल्कि जनता और किसानों को भी समय पर न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। अब देखना होगा कि शासन द्वारा दिए गए आश्वासनों को कितनी जल्दी धरातल पर उतारा जाता है।







