रायपुर । ग्राम अरकार में फसल चक्र परिवर्तन ने बालोद जिले के गुरूर विकासखंड में खेती की तस्वीर ही बदल दी है। पिछले लगभग 50 वर्षों से जहां ग्रीष्मकालीन धान की खेती होती आ रही थी, वहीं अब उन्हीं खेतों में मक्का, चना, सरसों, कुसुम, गेहूं और साग-सब्जियां लहलहा रही हैं। यह बदलाव केवल फसलों का नहीं, बल्कि जल संरक्षण, टिकाऊ कृषि और किसानों के सुरक्षित भविष्य की दिशा में उठाया गया एक ठोस कदम है।
🌾 ग्रीष्मकालीन धान से बढ़ा जल संकट
कृषि विभाग के अनुसार ग्राम अरकार का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 918.71 हेक्टेयर है, जिसमें से 698.38 हेक्टेयर भूमि कृषि योग्य है। लंबे समय तक ग्रीष्मकालीन धान की खेती के कारण भू-जल का अत्यधिक दोहन हुआ। इसका परिणाम यह हुआ कि गुरूर विकासखंड धीरे-धीरे ‘क्रिटिकल जोन’ की श्रेणी में पहुंच गया।
हर साल गर्मी के मौसम में पेयजल संकट गहराने लगा और खेतों के साथ-साथ गांव की जल आवश्यकताओं पर भी खतरा मंडराने लगा। इसी पृष्ठभूमि में ग्राम अरकार में फसल चक्र परिवर्तन की आवश्यकता महसूस की गई।
🚜 प्रशासन और किसानों की साझा पहल
जल संकट की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने किसानों के साथ मिलकर वैकल्पिक खेती को बढ़ावा देने का निर्णय लिया। किसानों को यह समझाया गया कि कम पानी वाली फसलें न केवल जल संरक्षण में मदद करेंगी, बल्कि आर्थिक रूप से भी लाभकारी सिद्ध होंगी।
📊 आंकड़ों में बदलाव की कहानी
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वर्ष 2024 में केवल 25 हेक्टेयर में दलहन-तिलहन की खेती
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वर्ष 2025 में 16 किसानों द्वारा 60 हेक्टेयर में वैकल्पिक फसलें
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एक ही वर्ष में 35 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में बदलाव
यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि ग्राम अरकार में फसल चक्र परिवर्तन अब एक आंदोलन का रूप ले रहा है।
🌱 कम पानी वाली फसलों की ओर बढ़ते कदम
अब अरकार के किसान ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर गेहूं, चना, बटरी, कुसुम, सरसों, धनिया और विभिन्न साग-सब्जियों की खेती कर रहे हैं। इन फसलों में पानी की खपत कम होती है और उत्पादन लागत भी अपेक्षाकृत कम रहती है।
कृषक चौपालों के माध्यम से किसानों को जल संरक्षण, फसल विविधिकरण और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई। साथ ही कृषि विभाग द्वारा बीज वितरण कर किसानों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा गया।
💰 बिक्री और समर्थन मूल्य की सुविधा
दलहन और तिलहन फसलों की बिक्री के लिए किसानों को बाजार की चिंता न हो, इसके लिए प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के अंतर्गत जिले में 18 उपार्जन केंद्र निर्धारित किए गए हैं। इन केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी की सुविधा उपलब्ध है।
इस व्यवस्था से ग्राम अरकार में फसल चक्र परिवर्तन किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी लाभदायक साबित हो रहा है।
🌍 पूरे क्षेत्र के लिए बन रहा मॉडल
अरकार गांव की यह पहल अब आसपास के गांवों के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। पानी की बचत, मिट्टी की उर्वरता में सुधार और फसल विविधता के कारण खेती अधिक टिकाऊ बन रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह फसल चक्र परिवर्तन को अपनाया गया, तो आने वाले वर्षों में जल संकट से काफी हद तक राहत मिल सकती है।
ग्राम अरकार में फसल चक्र परिवर्तन केवल एक कृषि प्रयोग नहीं, बल्कि जल संरक्षण और भविष्य की खेती को सुरक्षित करने की दिशा में एक मजबूत कदम है। धान से हटकर दलहन, तिलहन और सब्जी फसलों की ओर बढ़ते किसान यह साबित कर रहे हैं कि सही मार्गदर्शन और इच्छाशक्ति से खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है। अरकार गांव आज पूरे क्षेत्र के लिए एक आदर्श मॉडल बनकर उभरा है।







