रायपुर : आज से प्रदेशभर में छत्तीसगढ़ कर्मचारी हड़ताल की शुरुआत हो गई है, जिसके चलते राज्य के लगभग 4 लाख 50 हजार सरकारी अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर यह ‘काम बंद–कलम बंद’ आंदोलन शुरू किया गया है, जो 31 दिसंबर 2025 तक जारी रहेगा। इस व्यापक आंदोलन का सीधा असर राज्य के सरकारी दफ्तरों, स्कूलों और प्रशासनिक कार्यों पर पड़ना तय माना जा रहा है।
काम बंद–कलम बंद आंदोलन से सरकारी कामकाज प्रभावित
छत्तीसगढ़ कर्मचारी हड़ताल के कारण सचिवालय से लेकर जिला और ब्लॉक स्तर तक सरकारी कामकाज में भारी व्यवधान देखने को मिल सकता है। फेडरेशन का कहना है कि लंबे समय से लंबित 11 सूत्रीय मांगों को लेकर कर्मचारियों में भारी नाराजगी है, जिसके चलते यह आंदोलन शुरू करना पड़ा।
आम नागरिकों को प्रमाण पत्र, राजस्व कार्य, विभागीय अनुमोदन और अन्य शासकीय सेवाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
हड़ताल का चरणबद्ध कार्यक्रम
छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने छत्तीसगढ़ कर्मचारी हड़ताल को चरणबद्ध तरीके से संचालित करने की घोषणा की है:
29 और 30 दिसंबर
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सभी अधिकारी और कर्मचारी काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे
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दफ्तरों में रहकर प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा
31 दिसंबर
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सभी अधिकारी-कर्मचारी सामूहिक अवकाश लेकर धरना प्रदर्शन करेंगे
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प्रदेश के अधिकांश सरकारी कार्यालय पूरी तरह बंद रहेंगे
इस दिन सरकारी कामकाज लगभग ठप रहने की संभावना है।
स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था पर भी असर
छत्तीसगढ़ कर्मचारी हड़ताल को शिक्षक संगठनों का नैतिक समर्थन मिलने से शिक्षा व्यवस्था पर भी इसका असर देखने को मिलेगा। हालांकि विद्यार्थियों की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए कुछ संतुलन बनाया गया है।
जानकारी के अनुसार:
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जिन स्कूलों में 4 शिक्षक हैं, वहां 2 शिक्षक आंदोलन में शामिल होंगे
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शेष 2 शिक्षक स्कूल में रहकर बच्चों को पढ़ाएंगे
यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य सरकार ने 21 से 27 दिसंबर तक शीतकालीन अवकाश घोषित किया था और आज से छात्र पुनः विद्यालय लौट रहे हैं।
कर्मचारियों की 11 सूत्रीय प्रमुख मांगें
छत्तीसगढ़ कर्मचारी हड़ताल के पीछे कर्मचारियों की कई वर्षों से लंबित मांगें हैं। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
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महंगाई भत्ता (DA) और DA एरियर्स केंद्र के समान लागू किया जाए
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DA एरियर्स राशि GPF खाते में समायोजित की जाए
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सभी कर्मचारियों को चार स्तरीय समयमान वेतनमान मिले
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वेतन विसंगतियों को दूर करने पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक हो
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सेवा गणना में प्रथम नियुक्ति तिथि से संपूर्ण लाभ मिले
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पंचायत सचिवों का शासकीयकरण किया जाए
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सहायक शिक्षकों और पशु चिकित्सा अधिकारियों को तृतीय समयमान वेतनमान मिले
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नगरीय निकाय कर्मचारियों को नियमित वेतन और पदोन्नति मिले
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अनुकंपा नियुक्ति में 10% सीलिंग शिथिल की जाए
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कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू हो
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अर्जित अवकाश नगदीकरण 300 दिवस किया जाए
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दैनिक, संविदा और अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण की नीति बने
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सभी विभागों में सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष की जाए
सरकार पर बढ़ा दबाव
इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों के आंदोलन से राज्य सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी हड़ताल यदि लंबी चली, तो इसका असर प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ आम जनजीवन पर भी गहराई से पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच शीघ्र संवाद न होने की स्थिति में आंदोलन और तेज हो सकता है।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी हड़ताल ने राज्य के प्रशासनिक तंत्र को चुनौतीपूर्ण स्थिति में ला खड़ा किया है। 31 दिसंबर तक चलने वाले इस काम बंद–कलम बंद आंदोलन से सरकारी सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं। अब सभी की नजरें सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच संभावित बातचीत पर टिकी हैं, जिससे छत्तीसगढ़ कर्मचारी हड़ताल का समाधान निकल सके।







