कुरुद | श्रीमद भागवत सप्ताह चर्रा के अंतर्गत आयोजित धार्मिक आयोजन में भगवताचार्य शिवानंद महाराज ने वर्तमान समाज की दिशा और दशा पर गहन चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव से समाज का एक वर्ग भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों को विकृत करने में लगा हुआ है। नशे की बढ़ती प्रवृत्ति ने युवाओं को धर्म, परिवार और सामाजिक जिम्मेदारियों से दूर कर दिया है, जो समाज के लिए घातक संकेत है।
साहू पारा चर्रा में आयोजित श्रीमद भागवत सप्ताह
कुरुद जनपद अंतर्गत सांसद आदर्श ग्राम चर्रा के साहू पारा में आयोजित श्रीमद भागवत सप्ताह चर्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। व्यासपीठ से कथा का वाचन करते हुए भगवताचार्य शिवानंद महाराज ने श्रीमद भागवत के गूढ़ रहस्यों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया। कथा के दौरान उन्होंने समुद्र मंथन की पौराणिक कथा के माध्यम से वर्तमान समय की सामाजिक परिस्थितियों की तुलना की।
समुद्र मंथन कथा और वर्तमान समाज का संदर्भ
भगवताचार्य ने बताया कि जब सनातन धर्म में विकार बढ़ने लगे और देव संस्कृति कमजोर हुई, तब असुरी प्रवृत्तियां बलवान होने लगीं। देवताओं के गुरु बृहस्पति और असुरों के गुरु शुक्राचार्य के परामर्श से समुद्र मंथन हुआ। मंथन से अमृत कलश निकला, लेकिन उसे पाने के लिए देवताओं और असुरों में संघर्ष शुरू हो गया।
भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमृतपान कराया। राहु-केतु द्वारा छल से अमृत ग्रहण करने का प्रयास आज भी प्रतीकात्मक रूप से समाज में मौजूद असुरी प्रवृत्तियों को दर्शाता है। श्रीमद भागवत सप्ताह चर्रा के मंच से यह संदेश दिया गया कि आज भी राहु-केतु जैसी शक्तियां सनातन संस्कृति को निगलने का प्रयास कर रही हैं।
नशाखोरी और युवाओं का भटकाव
आचार्य शिवानंद महाराज ने कहा कि आज का युवा नशे के करीब और मंदिर, मस्जिद व गिरजाघर से दूर होता जा रहा है। नशापान के कारण पारिवारिक कलह बढ़ रही है और युवा घर-गृहस्थी संभालने में असफल हो रहे हैं। इससे हताशा, अपराध, नफरत और आत्महत्या जैसी गंभीर समस्याएं जन्म ले रही हैं।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि श्रीमद भागवत सप्ताह चर्रा जैसे आयोजन समाज को सही दिशा देने का माध्यम हैं, जहां धर्म और संस्कृति के मूल संदेशों को जन-जन तक पहुंचाया जाता है।
सामाजिक कुरीतियों पर चिंता
कथा के दौरान समाज में बढ़ती चोरी, डकैती, हिंसा, जातिवाद, नशाखोरी, नक्सलवाद और आतंकवाद जैसी समस्याओं पर भी चिंता जताई गई। उन्होंने कहा कि ये सभी असुरी शक्तियां न केवल सनातन धर्म बल्कि देश के समग्र विकास में भी बाधक हैं।
इस संदर्भ में धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक संगठनों से समय रहते जागरूक होकर सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील की गई।
गणमान्य जनों की रही उपस्थिति
श्रीमद भागवत सप्ताह चर्रा में प्रमुख रूप से प्रतिभा अजय चन्द्राकर, सरपंच कमलेश्वरी ध्रुव, एल.पी. गोस्वामी, बसंत सिन्हा, कृपाराम यादव, भानु बैस, टीकाराम ध्रुव, ललिता यादव, रामनाथ साहू, नंदनी साहू, खिलावन देवांगन, उत्तम बैस, प्रेमलाल, रामकुमार, लोकसिंह साहू, तोरण साहू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
सनातन संस्कृति और समाज की जिम्मेदारी
सनातन धर्म को सभी धर्मों की जननी बताते हुए आचार्य शिवानंद महाराज ने कहा कि यदि समाज समय रहते नहीं चेता, तो इसके दुष्परिणाम आने वाली पीढ़ियों को भुगतने पड़ेंगे। श्रीमद भागवत सप्ताह चर्रा जैसे आयोजन लोगों को आत्ममंथन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की प्रेरणा देते हैं।
श्रीमद भागवत सप्ताह चर्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देने का सशक्त माध्यम है। शिवानंद महाराज के विचारों ने यह स्पष्ट कर दिया कि सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए सामाजिक जागरूकता, संयम और नैतिक मूल्यों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है।







