कुरुद | धमतरी धान खरीदी अव्यवस्था एक बार फिर किसानों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गई है। धान खरीदी की अंतिम तिथि में अब मात्र दो दिन शेष हैं, लेकिन धमतरी जिले में 6 हजार से अधिक किसान अब भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा किसानों के घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया जारी है, जिससे व्यवस्था और अधिक उलझती नजर आ रही है। इस प्रशासनिक अव्यवस्था का सीधा असर किसानों की सरकार के प्रति सोच पर पड़ रहा है।
मोदी की गारंटी पर उठे सवाल, 21 क्विंटल प्रति एकड़ की खरीद अधूरी
भारतीय जनता पार्टी के घोषणा पत्र और मोदी की गारंटी में किसानों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदने का वादा किया गया था। लेकिन धमतरी धान खरीदी अव्यवस्था ने इस दावे की सच्चाई उजागर कर दी है। प्रशासनिक आंकड़े खुद गवाही दे रहे हैं कि अब तक तय लक्ष्य के अनुरूप धान खरीदी पूरी नहीं हो सकी है।
सरकारी आंकड़ों ने खोली पोल
धमतरी जिले में:
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पंजीकृत किसानों की संख्या: 1,29,329
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पंजीकृत रकबा: 1,27,514.57 हेक्टेयर
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प्रति हेक्टेयर धान बिक्री: 51.89 क्विंटल
इस हिसाब से जिले में कुल 66,16,727.9239 क्विंटल धान की खरीदी होनी चाहिए थी।
लेकिन सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक सिर्फ 57,63,407.60 क्विंटल धान की ही खरीदी हो पाई है।
➡️ यानी 8,53,647.5239 क्विंटल धान अभी भी खरीदा जाना बाकी है, जो धमतरी धान खरीदी अव्यवस्था की गंभीरता को दर्शाता है।
6 हजार से अधिक किसान अब भी वंचित
अधिकारियों के अनुसार:
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99,321 किसानों ने 6,414.80 हेक्टेयर रकबा समर्पित किया है
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फिर भी 6 हजार से अधिक किसान अब तक अपना धान नहीं बेच पाए हैं
सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिन किसानों पर समितियों का कर्ज है, उनके टोकन काटने को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे छोटे और कर्ज-मुक्त किसान पीछे छूटते जा रहे हैं।
भौतिक सत्यापन पर उठे सवाल
सहकारी समिति कुरूद के पूर्व अध्यक्ष चन्द्रशेखर चंद्राकर ने स्पष्ट कहा कि जब किसानों की गिरदावरी पहले ही हो चुकी है, तो उसके अनुसार पूरा धान खरीदा जाना चाहिए। उन्होंने कहा:
“धान खेत में रखा है, ब्यारा में है या पड़ोसी के घर—इतनी जांच-पड़ताल की जरूरत नहीं होनी चाहिए।”
यह बयान धमतरी धान खरीदी अव्यवस्था में प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जटिलता को उजागर करता है।
बैंक और प्रशासन के अलग-अलग बयान
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर के अध्यक्ष निरंजन सिन्हा ने कहा कि:
“टोकन काटना राजस्व अधिकारियों का काम है। हमारा दायित्व है कि जिन किसानों का टोकन कट चुका है, उनका पूरा धान खरीदा जाए और समय पर भुगतान किया जाए।”
वहीं कलेक्टर से जब पूछा गया कि अब केवल दो दिन शेष हैं और 6 हजार किसान अब भी प्रतीक्षा में हैं, तो उन्होंने कहा कि:
“कल-परसों तक सभी किसानों का टोकन कट जाएगा।”
हालांकि ज़मीनी हालात धमतरी धान खरीदी अव्यवस्था को और गंभीर दिखाते हैं।
किसानों में बढ़ता असंतोष
लगातार हो रही देरी, भौतिक सत्यापन और टोकन व्यवस्था की खामियों के कारण किसानों में असंतोष बढ़ रहा है। इससे न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि सरकार की घोषणाओं की विश्वसनीयता भी प्रभावित हो रही है।







