
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून से पहले आयुष मंत्रालय देशभर में लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए जागरूक करने में जुटा हुआ है। मंत्रालय की ओर से ‘365 डे योगा’ अभियान चलाकर नियमित योग को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत मई माह में विभिन्न राज्यों में योग कार्यशालाएं आयोजित करने की तैयारी है, जहां लोगों को योग के सही अभ्यास और इसके लाभों के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसी कड़ी में मंत्रालय ने हाल ही में अष्टांग नमस्कारासन के महत्व और उससे होने वाले शारीरिक लाभों को साझा किया है, जिसे संतुलन, शक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
मंत्रालय के अनुसार अष्टांग नमस्कारासन सूर्य नमस्कार का छठा आसन है, जिसमें शरीर के आठ अंग—दोनों पैर के अंगूठे, दोनों घुटने, दोनों हथेलियां, छाती और ठोड़ी जमीन को स्पर्श करते हैं। इस आसन को करने के लिए व्यक्ति को पहले पेट के बल लेटना होता है और ठोड़ी को जमीन पर टिकाते हुए कूल्हों को धीरे-धीरे ऊपर उठाना होता है, जबकि शरीर के अन्य अंग जमीन से सटे रहते हैं। कुछ समय तक इस स्थिति में रहकर गहरी सांस लेने से शरीर में संतुलन और स्थिरता आती है। इसके बाद कोबरा पोज में लौटने से कमर और पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव आता है, जिससे जकड़न कम होती है और लचीलापन बढ़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए यह आसन बेहद लाभकारी है, क्योंकि यह कंधों, बाजुओं और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और रक्त संचार को बेहतर करता है। साथ ही, यह सांसों को नियंत्रित करने में भी मदद करता है, जिससे मानसिक संतुलन में सुधार होता है। मंत्रालय ने लोगों को योग करते समय सावधानी बरतने और सही तकनीक अपनाने की सलाह दी है, ताकि किसी प्रकार की चोट से बचा जा सके। अधिक जानकारी और योग से जुड़े दिशा-निर्देशों के लिए इच्छुक लोग आधिकारिक वेबसाइट https://ayush.gov.in/ पर जाकर विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।







