
नारायणपुर। शहर की जीएडी कॉलोनी में एक अनोखी लेकिन चिंताजनक घटना सामने आई, जहां एक बैल चार दिनों तक एक मकान की छत पर फंसा रहा। लगातार चार दिन तक बैल के छत पर फंसे रहने से उसकी हालत कमजोर होने लगी थी और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ती जा रही थी। बताया गया कि कॉलोनी के संबंधित ब्लॉक के कर्मचारी अवकाश पर होने के कारण समय पर रेस्क्यू कार्य शुरू नहीं हो सका, जिससे स्थिति और गंभीर होती चली गई। आसपास के रहवासियों ने कई बार प्रयास किए, लेकिन संसाधनों और तकनीकी मदद के अभाव में बैल को सुरक्षित नीचे उतारना संभव नहीं हो पा रहा था।
घटना की जानकारी मिलते ही दूसरे ब्लॉक के कर्मचारियों ने तत्परता दिखाते हुए राहत कार्य शुरू किया। उन्होंने सीमित संसाधनों के बीच समन्वय बनाकर रेस्क्यू अभियान चलाया और बैल को सुरक्षित नीचे लाने की रणनीति तैयार की। इस दौरान कृष्णा वड्डे और कन्हैया लाल उईके ने विशेष भूमिका निभाई। दोनों ने अपनी समझदारी और साहस का परिचय देते हुए टीम के साथ मिलकर बैल को धीरे-धीरे नियंत्रित किया और कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद रविवार सुबह उसे सकुशल नीचे उतार लिया। इस पूरे अभियान के दौरान यह भी सुनिश्चित किया गया कि बैल को किसी प्रकार की चोट न पहुंचे।
घटना के बाद कॉलोनीवासियों ने राहत की सांस ली और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर पहल नहीं होती तो बैल की जान को खतरा हो सकता था। इस घटना ने एक बार फिर आपात स्थितियों में त्वरित कार्रवाई और समन्वय की आवश्यकता को उजागर किया है। प्रशासन की ओर से भी इस तरह की घटनाओं में त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि भविष्य में किसी भी जीव या व्यक्ति को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। पशु सुरक्षा और बचाव से जुड़ी जानकारी के लिए संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट https://www.dahd.nic.in/ पर भी मार्गदर्शन उपलब्ध है।







