नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपीलों को लेकर देश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने प्रधानमंत्री द्वारा सोने की खरीद कम करने और ईंधन बचत को लेकर दिए गए सुझावों पर चिंता जताते हुए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घोषणाओं का देश की अर्थव्यवस्था, निवेश माहौल और आम जनता पर दूरगामी असर पड़ सकता है, इसलिए सरकार को व्यापक परामर्श के बाद आगे की रणनीति तय करनी चाहिए।
शरद पवार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने बयान में कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में सरकार को अधिक संवेदनशीलता और संवाद की आवश्यकता है। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री की हालिया घोषणाओं के बाद व्यापारिक और औद्योगिक क्षेत्रों के साथ-साथ निवेशकों के बीच भी बेचैनी का माहौल बना है। पवार ने कहा कि राष्ट्रीय हित से जुड़े ऐसे मुद्दों पर सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि उनकी अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक आयोजित कर आर्थिक और रणनीतिक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की जाए। इसके साथ ही उन्होंने देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों, उद्योग प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों की बैठक बुलाकर हालात की समीक्षा करने की भी मांग की।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में हैदराबाद के सिकंदराबाद परेड ग्राउंड में आयोजित जनसभा के दौरान देशवासियों से अगले एक वर्ष तक सोने की खरीद कम करने की अपील की थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने ईंधन की खपत घटाने के लिए सार्वजनिक परिवहन, मेट्रो और साझा यात्रा के अधिक उपयोग पर भी जोर दिया था। इसके अलावा कोविड-19 महामारी के दौरान अपनाए गए कुछ कार्यकुशल उपायों को दोबारा लागू करने का सुझाव भी दिया गया था। राजनीतिक और आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकट के दौर में सरकार की ऐसी अपीलें आम लोगों के व्यवहार और बाजार की दिशा दोनों को प्रभावित कर सकती हैं।
विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार को जनता और उद्योग जगत के बीच विश्वास कायम रखने के लिए स्पष्ट आर्थिक रोडमैप सामने रखना चाहिए, जबकि भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री की अपीलों को राष्ट्रहित में उठाया गया एहतियाती कदम बताया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय हालात का असर सीधे तौर पर भारत की अर्थव्यवस्था, आयात-निर्यात और निवेश माहौल पर पड़ सकता है।
इस विषय से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए Prime Minister of India Official Website देखा जा सकता है।






