रायपुर। दुर्ग जिले के कुम्हारी क्षेत्र में मंगलवार को हुए भीषण आग हादसे ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया। गैस सिलेंडर ब्लास्ट और बिजली लाइन में शॉर्ट सर्किट से शुरू हुई इस दर्दनाक घटना में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई, जिनमें डेढ़ साल की मासूम बच्ची भी शामिल है। हादसे के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल है, वहीं स्थानीय लोगों में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी भी देखने को मिल रही है। प्रारंभिक जांच में बिजली विभाग की मुख्य लाइन में शॉर्ट सर्किट और अत्यधिक लोड को आग लगने का प्रमुख कारण माना गया है। घटना के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री सहायता कोष से प्रति व्यक्ति 5 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है। इसके अलावा जिला प्रशासन की ओर से 4 लाख रुपये अतिरिक्त सहायता देने की बात कही गई है। इस तरह प्रत्येक मृतक के परिवार को कुल 9 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी।
जानकारी के अनुसार हादसे में अनिल वैष्णव (45 वर्ष), चांदनी वैष्णव (18 वर्ष), लक्ष्मी (20 वर्ष) और डेढ़ वर्षीय गोपिका की मौत हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के मुताबिक बिजली पोल में लंबे समय से अत्यधिक लोड की समस्या बनी हुई थी। मंगलवार को अचानक मुख्य लाइन में शॉर्ट सर्किट हुआ और चिंगारी निकलने के बाद आग तेजी से फैल गई। आग ने पास स्थित कच्चे मकान को अपनी चपेट में ले लिया। घर में मौजूद लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल पाया। इसी दौरान गैस सिलेंडर में विस्फोट हो गया, जिससे आग और अधिक भयावह हो गई। आसपास के लोगों ने बचाव का प्रयास किया, लेकिन आग की तीव्रता और संकरे रास्तों के कारण राहत कार्य प्रभावित हुआ। सूचना मिलने के बाद दमकल और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची, मगर तब तक चारों लोगों की जान जा चुकी थी। हादसे के बाद बच्ची की मां बेसुध हो गई, जिसे परिजनों और स्थानीय लोगों ने संभाला।
घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे। गजेंद्र यादव, श्याम बिहारी जायसवाल, विजय बघेल और रिकेश सेन ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर शोक व्यक्त किया और हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया। कलेक्टर और पुलिस प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है तथा तकनीकी टीम से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से बिजली लाइन पर अत्यधिक दबाव की शिकायत की जा रही थी, लेकिन समय रहते सुधार कार्य नहीं किया गया। इस हादसे ने एक बार फिर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था की निगरानी, जर्जर लाइनों के रखरखाव और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने लोगों से भी बिजली संबंधी किसी भी खतरे या तकनीकी खराबी की सूचना तत्काल विभाग को देने की अपील की है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके। बिजली सुरक्षा और आपदा प्रबंधन से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए Chhattisgarh State Power Distribution Company Limited देखा जा सकता है।







