नई दिल्ली। भारतीय हॉकी के दिग्गज खिलाड़ी और पूर्व कप्तान PR Sreejesh ने हॉकी इंडिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जूनियर पुरुष हॉकी टीम के कोच पद से हटाए जाने की खबरों के बीच श्रीजेश ने दावा किया है कि भारतीय कोचों की तुलना में विदेशी कोचों को अधिक प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि शानदार प्रदर्शन के बावजूद उनका कोचिंग कार्यकाल अचानक समाप्त किया जा रहा है। श्रीजेश के बयान के बाद भारतीय हॉकी जगत में एक नई बहस शुरू हो गई है, जिसमें घरेलू और विदेशी कोचों के बीच प्राथमिकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
श्रीजेश ने अपने पोस्ट में लिखा कि पिछले डेढ़ वर्ष के दौरान जूनियर टीम ने पांच बड़े टूर्नामेंट खेले और सभी में पोडियम फिनिश हासिल की। इनमें जूनियर विश्व कप का कांस्य पदक भी शामिल है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर खराब प्रदर्शन के बाद कोचों को हटाए जाने की बातें सुनने को मिलती हैं, लेकिन उनके मामले में ऐसा नहीं है। उनका आरोप है कि जूनियर टीम में विदेशी कोच को जगह देने के लिए उन्हें हटाया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि Hockey India के अध्यक्ष ने उनसे कहा कि सीनियर पुरुष टीम के मुख्य कोच जूनियर स्तर पर भी विदेशी हेड कोच चाहते हैं ताकि जूनियर से लेकर सीनियर स्तर तक एक समान कोचिंग प्रणाली लागू की जा सके। श्रीजेश का कहना है कि इसी सोच के कारण भारतीय कोचों की अनदेखी हो रही है।
भारतीय पुरुष हॉकी टीम के पूर्व कप्तान श्रीजेश देश के सबसे सफल गोलकीपरों में गिने जाते हैं। उन्होंने 2020 और 2024 ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और टीम की कई ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका निभाई। सक्रिय खेल करियर के बाद उन्हें जूनियर टीम की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और उनके कार्यकाल में टीम का प्रदर्शन लगातार बेहतर माना गया। ऐसे में अचानक हटाए जाने की चर्चा ने खिलाड़ियों और हॉकी प्रेमियों के बीच भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि हॉकी इंडिया की ओर से इस पूरे विवाद पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय कोचों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव देने और उन्हें लंबी अवधि तक जिम्मेदारी सौंपने की आवश्यकता है। वहीं कुछ जानकार विदेशी कोचों की नियुक्ति को आधुनिक तकनीक और वैश्विक अनुभव से जोड़कर देख रहे हैं। इस विवाद ने भारतीय खेल प्रशासन में पारदर्शिता और चयन प्रक्रिया को लेकर भी नई चर्चा शुरू कर दी है। यदि मामले पर जल्द स्पष्टता नहीं आती, तो इसका असर जूनियर खिलाड़ियों के मनोबल और टीम की तैयारियों पर भी पड़ सकता है। भारतीय हॉकी और प्रशासनिक गतिविधियों से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए हॉकी इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है।

