
कुरूद। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी कुरूद के अध्यक्ष महिम शुक्ला ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पेट्रोल एवं डीजल की बिक्री को लेकर जारी नए आदेश की कड़ी आलोचना करते हुए इसे तानाशाहीपूर्ण, अव्यवहारिक और किसान विरोधी निर्णय बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार पश्चिम एशिया संकट का हवाला देकर अपनी प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने का प्रयास कर रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि प्रदेश की भाजपा सरकार स्थिति को संभालने में पूरी तरह असफल साबित हुई है।
महिम शुक्ला ने कहा कि खेती-किसानी में डीजल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। खरीफ सीजन की तैयारियां शुरू होने वाली हैं और किसान खेतों की जुताई, सिंचाई तथा कृषि यंत्रों के संचालन के लिए डीजल पर निर्भर हैं। ऐसे समय में किसानों को जेरीकेन में डीजल प्राप्त करने के लिए एसडीएम की अनुमति लेने की बाध्यता थोपना किसानों को अनावश्यक रूप से सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर करेगा। गांवों में लगे डीजल पंप, सिंचाई इंजन और अन्य कृषि उपकरणों को पेट्रोल पंप तक ले जाना संभव नहीं है, इसलिए वर्षों से किसान जेरीकेन के माध्यम से डीजल लेकर खेती का कार्य करते आए हैं।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार को कालाबाजारी या जमाखोरी की चिंता है तो उसके लिए प्रभावी निगरानी तंत्र विकसित किया जाना चाहिए, लेकिन पूरे किसान वर्ग को संदेह की दृष्टि से देखकर उन पर प्रशासनिक प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदेश के लाखों किसान हर बार डीजल लेने के लिए किस प्रकार अनुमति प्राप्त करेंगे और यदि समय पर अनुमति नहीं मिली तो खेती का कार्य बाधित होने की जिम्मेदारी कौन लेगा।
महिम शुक्ला ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार लगातार ऐसे फैसले ले रही है जिनका सबसे अधिक दुष्प्रभाव किसानों, मजदूरों और ग्रामीण वर्ग पर पड़ रहा है। एक ओर सरकार किसानों की आय बढ़ाने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर खेती के लिए आवश्यक डीजल प्राप्त करने की प्रक्रिया को जटिल बनाकर किसानों की परेशानियां बढ़ा रही है। यह निर्णय किसानों की जरूरतों और ग्रामीण वास्तविकताओं से पूरी तरह अनभिज्ञ प्रशासनिक सोच को दर्शाता है।

ब्लॉक कांग्रेस कमेटी कुरूद ने राज्य सरकार से इस आदेश की तत्काल समीक्षा करने तथा किसानों के लिए डीजल प्राप्त करने की व्यवस्था को सरल और सुगम बनाने की मांग की है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि किसान हितों की अनदेखी जारी रही तो कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।
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