छत्तीसगढ़। कुरुद-धमतरी को नगरी, गरियाबंद और ओडिशा से जोड़ने वाले महानदी पर निर्माणाधीन मेघा पुल में शनिवार दोपहर एक बड़ा हादसा टल गया, जब पुल के पिल्लरों पर क्रेन की सहायता से चढ़ाया जा रहा भारी गर्डर अचानक नीचे गिर गया। घटना के समय निर्माण स्थल पर कई मजदूर और कर्मचारी मौजूद थे, लेकिन राहत की बात यह रही कि किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हादसे के बाद निर्माण कार्य से जुड़े अधिकारियों और स्थानीय लोगों के बीच पुल निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि गर्डर चढ़ाने का कार्य विभागीय इंजीनियरों की अनुपस्थिति में गैर-तकनीकी लोगों की निगरानी में किया जा रहा था, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई। घटना के बाद क्षतिग्रस्त गर्डर को लेकर निर्माण की गुणवत्ता पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतना भारी गर्डर गिरने के बाद उसके टुकड़े-टुकड़े होना निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। वहीं, घटना के तुरंत बाद मलबा हटाने की प्रक्रिया शुरू किए जाने पर भी कुछ लोगों ने आपत्ति जताते हुए इसे साक्ष्य मिटाने की कोशिश बताया है।
जिला पंचायत सदस्य एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता नीलम चन्द्राकर ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गिरकर गर्डर का बिखर जाना घटिया निर्माण का संकेत है और ठेकेदार द्वारा जल्दबाजी में मलबा हटाकर साक्ष्य छिपाने का प्रयास किया गया। उन्होंने पूरे मामले की तकनीकी जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर, संबंधित ठेकेदार श्री बंसल ने किसी भी प्रकार की लापरवाही से इनकार करते हुए कहा कि क्रेन स्लिप होने के कारण गर्डर नीचे गिरा और इसे जल्द ही दुरुस्त कर लिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि 21 सितंबर 2024 को महानदी पर स्थित पुराना मेघा पुल क्षतिग्रस्त हो गया था, जिससे कुरुद और मगरलोड ब्लॉक के बीच सीधी आवाजाही प्रभावित हुई थी। पुल बंद होने के कारण किसानों, व्यापारियों और आम नागरिकों को लंबे समय तक परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके बाद सरकार ने जनसुविधा को ध्यान में रखते हुए 46.97 करोड़ रुपये की लागत से नए हाई लेवल पुल के निर्माण की मंजूरी दी और इसकी जिम्मेदारी सेतु निर्माण निगम को सौंपी गई। पिछले एक वर्ष से अधिक समय से निर्माण कार्य जारी है और इसे क्षेत्र की जीवनरेखा माना जा रहा है।
घटना के बाद सेतु निर्माण निगम के अधिकारी मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुट गए हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि पुल निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और सुरक्षा व्यवस्था की स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सके। निर्माणाधीन पुल क्षेत्र के हजारों लोगों की आवाजाही और आर्थिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ है, ऐसे में इस परियोजना की पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी बन गई है। परियोजना और विभागीय जानकारी के लिए छत्तीसगढ़ लोक निर्माण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है। https://pwd.cg.gov.in?utm_source=chatgpt.com







