छत्तीसगढ़। प्रदेश में डॉक्टर बनने का सपना देख रहे हजारों विद्यार्थियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए राज्य के 10 सरकारी और एक निजी मेडिकल कॉलेज की कुल 1530 एमबीबीएस सीटों का नवीनीकरण कर दिया है। इस मंजूरी के बाद इन सीटों पर नए सत्र में प्रवेश का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। स्वीकृत सीटों में 1430 सीटें सरकारी मेडिकल कॉलेजों की हैं, जबकि 100 सीटें एक निजी मेडिकल कॉलेज के हिस्से में आई हैं। हालांकि राज्य के चार अन्य निजी मेडिकल कॉलेजों को मान्यता के लिए अभी कुछ समय और इंतजार करना पड़ सकता है।
चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस वर्ष प्रदेश में एमबीबीएस सीटों की संख्या में और वृद्धि हो सकती है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में कुल 2330 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध हैं और नए सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी मिलने की स्थिति में यह आंकड़ा 2500 के पार पहुंच सकता है। राज्य सरकार तीन नए सरकारी मेडिकल कॉलेज और एक नए निजी मेडिकल कॉलेज को शुरू करने की तैयारी में जुटी है। इसके साथ ही कुछ पुराने मेडिकल कॉलेजों में बुनियादी ढांचे को मजबूत कर सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव भी भेजा गया है, जिस पर अंतिम निर्णय होना बाकी है।
एनएमसी द्वारा समय पर सीटों के नवीनीकरण से इस वर्ष नीट यूजी परीक्षा में शामिल हुए छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा। सीटों की स्थिति स्पष्ट होने से काउंसलिंग प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी और विद्यार्थियों को कॉलेजों के अधिक विकल्प मिल सकेंगे। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रदेश में सीटों की संख्या बढ़ती है तो इसका असर काउंसलिंग के कटऑफ पर भी दिखाई दे सकता है। कटऑफ में संभावित कमी से मध्यम रैंक हासिल करने वाले छात्रों के लिए सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के अवसर बढ़ जाएंगे।
राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में से दंतेवाड़ा, कवर्धा और जांजगीर-चांपा के लिए स्थिति सकारात्मक मानी जा रही है। इन जिलों में पहले से संचालित जिला अस्पताल और आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होने के कारण एनएमसी के मानकों को पूरा करने में अपेक्षाकृत कम कठिनाई आई है। माना जा रहा है कि इन तीन जिलों को इस सत्र से पहली बार मेडिकल कॉलेज की सौगात मिल सकती है। दूसरी ओर कुनकुरी और मनेंद्रगढ़ में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेजों का मामला अभी अधर में है। दोनों स्थानों पर बड़े अस्पतालों और आवश्यक चिकित्सा ढांचे का काम अभी पूरा नहीं हो सका है, जिसके चलते एनएमसी की मान्यता मिलने में और समय लग सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश में मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ने से न केवल स्थानीय छात्रों को फायदा मिलेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने में भी मदद मिलेगी। मेडिकल शिक्षा और एनएमसी से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए छात्र नेशनल मेडिकल कमीशन की आधिकारिक वेबसाइट पर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।







