जलवायु परिवर्तन से लड़ने और आत्मनिर्भर बनने की राह पर बढ़ीं जिले की एकल महिलाएं

 

कुरुद । धमतरी जिले के विभिन्न विकासखंडों में जलवायु परिवर्तन के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने और विधवा, परित्यक्ता एवं तलाकशुदा महिलाओं को सतत आजीविका से जोड़ने के उद्देश्य से प्रेरक मितान फाउंडेशन द्वारा संवाद एवं जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से एकल महिलाओं को पर्यावरण संरक्षण, जलवायु अनुकूल जीवनशैली और सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। संस्था का मानना है कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए समुदाय की सक्रिय भागीदारी और महिलाओं की नेतृत्वकारी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

कुरुद विकासखंड के ग्राम पंचायत चरमुडिया एवं अटंग में आयोजित संवाद कार्यक्रम के दौरान संस्था की टीम ने महिलाओं से सीधे संवाद स्थापित कर जलवायु परिवर्तन के स्थानीय प्रभावों, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और आजीविका के नए अवसरों पर विस्तार से चर्चा की। वहीं मगरलोड विकासखंड के ग्राम अरौद, कुण्डेल एवं भोथीडीही में महिला समूहों के साथ आयोजित बैठकों में उन्हें केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में महिलाओं को बताया गया कि सरकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ लेकर वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ अपने परिवार के जीवन स्तर में भी सुधार ला सकती हैं।

इसी क्रम में नगरी विकासखंड के ग्राम छिपली एवं ठेनहीं तथा धमतरी विकासखंड के मार्दापोटी एवं सियादेही में आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों में जल संरक्षण, वृक्षारोपण, जैविक खेती, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। महिलाओं को यह भी बताया गया कि बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे प्रयास भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसके साथ ही महिला अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, सरकारी सहायता, आत्मनिर्भरता और सामुदायिक सहभागिता जैसे विषयों पर भी विस्तार से जानकारी साझा की गई।

बैठकों में शामिल महिलाओं ने जलवायु अनुकूल आजीविका गतिविधियों से जुड़ने में रुचि व्यक्त करते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए सामुदायिक स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि आने वाले समय में जिले के अन्य गांवों में भी इसी प्रकार के जागरूकता एवं क्षमता विकास कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक एकल महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा, आजीविका के अवसर और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रयासों का लाभ मिल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती का समाधान तभी संभव है, जब स्थानीय समुदाय, विशेषकर महिलाएं, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रयासों में सक्रिय भागीदार बनें। इस दिशा में संचालित ऐसे कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की नई संभावनाएं भी तैयार कर रहे हैं।

अधिक जानकारी के लिए भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है: https://moefcc.gov.in/

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan