रायपुर जेल की ‘रोटी’ अब आम लोगों के लिए भी, 275 रुपए में मिलेगा भोजन पैकेट

छत्तीसगढ़। केंद्रीय जेल प्रशासन ने आम नागरिकों के लिए एक अनोखी पहल शुरू करने की तैयारी की है। अब रायपुर केंद्रीय जेल में कैदियों के हाथों तैयार किया गया भोजन शहर के लोग भी खरीद सकेंगे। इसके लिए जेल की आस्था कैंटीन और कैफे सेंटर के माध्यम से ‘जेल की रोटी’ नाम से विशेष फूड पैकेट उपलब्ध कराया जाएगा। योजना अगस्त महीने से शुरू करने की तैयारी है। शुरुआती चरण में प्रतिदिन 30 फूड पैकेट तैयार किए जाएंगे और प्रत्येक पैकेट की कीमत 275 रुपये निर्धारित की गई है। जेल प्रबंधन के अनुसार, सीमित संख्या में पैकेट तैयार करने का उद्देश्य शुरुआत में पूरी व्यवस्था, भोजन की गुणवत्ता और वितरण प्रक्रिया को व्यवस्थित रखना है।

‘जेल की रोटी’ खरीदने के लिए आम नागरिकों को जेल परिसर स्थित आस्था कैंटीन में पहले से एडवांस बुकिंग करानी होगी। बुकिंग के आधार पर निर्धारित समय पर भोजन का पैकेट उपलब्ध कराया जाएगा। जेल प्रशासन का कहना है कि भोजन जेल परिसर के भीतर निर्धारित प्रक्रिया और स्वच्छता का ध्यान रखते हुए तैयार किया जाएगा। रायपुर केंद्रीय जेल की आस्था कैंटीन पहले से ही अपने खाद्य उत्पादों के लिए लोगों के बीच पहचान रखती है। यहां कैदियों द्वारा तैयार की जाने वाली मुंगौड़ी के अलावा समोसा, जलेबी और अन्य खाद्य सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे में ‘जेल की रोटी’ के जरिए इस गतिविधि को आम नागरिकों तक और व्यापक स्तर पर पहुंचाने की पहल की जा रही है।

रायपुर सेंट्रल जेल के अधीक्षक योगेश क्षत्री के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य व्यावसायिक लाभ कमाना नहीं, बल्कि कैदियों को काम से जोड़ना और उन्हें उपयोगी कौशल सिखाना है। भोजन तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल कैदियों को अपनी कार्यक्षमता विकसित करने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा। जेल से रिहा होने के बाद वे सीखे हुए हुनर का उपयोग रोजगार या स्वरोजगार के लिए कर सकें, इसी उद्देश्य से ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। योजना से मिलने वाली आय को भी कैदियों के कल्याण और पुनर्वास से संबंधित गतिविधियों में उपयोग किए जाने की बात कही गई है।

जेल प्रशासन की यह पहल सुधारात्मक व्यवस्था के उस उद्देश्य से भी जुड़ी है, जिसमें बंदियों को केवल सजा तक सीमित रखने के बजाय उन्हें कौशल और रोजगार से जोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार किया जाता है। छत्तीसगढ़ सरकार के आधिकारिक जनसंपर्क प्रकाशनों में भी जेल एवं सुधार से जुड़ी योजनाओं तथा कैदियों के कौशल विकास पर जोर दिए जाने का उल्लेख मिलता है। Jan Sampark आम नागरिकों के लिए ‘जेल की रोटी’ की शुरुआत इसी दिशा में एक अलग प्रयोग मानी जा रही है। यदि शुरुआती चरण में लोगों की मांग बढ़ती है और व्यवस्था सफल रहती है, तो भविष्य में रोजाना तैयार होने वाले फूड पैकेट की संख्या बढ़ाई जा सकती है। रायपुर जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan