अहिराज की टूटी रीढ़ का हुआ दुर्लभ ऑपरेशन, स्टील वायर से बचाई जान

 

बिलासपुर। नाग पंचमी के मौके पर सांपों के प्रति संवेदनशीलता और जीव-जंतुओं के संरक्षण का संदेश देने वाली एक अनूठी घटना सामने आती है, जब गंभीर रूप से घायल अहिराज यानी बैंडेड करैत सांप की पशु चिकित्सक ने दुर्लभ सर्जरी कर उसकी जान बचाई। यह मामला 18 जून 2020 का है। बिलासपुर के सर्पमित्र बब्बू सोनी घायल अहिराज को लेकर तत्कालीन संयुक्त संचालक कार्यालय पहुंचे थे। पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग के उप संचालक डॉ. आर.एम. त्रिपाठी ने जांच की तो पता चला कि सांप की रीढ़ की हड्डी टूट चुकी थी। चोट इतनी गंभीर थी कि उसका पिछला हिस्सा लगभग पूरी तरह निष्क्रिय हो गया था और केवल सिर तथा शरीर का अगला हिस्सा ही हलचल कर रहा था।

जांच के दौरान डॉ. त्रिपाठी ने टूटी हुई वर्टिब्रा को दबाकर उसकी स्थिति सही करने का प्रयास किया। इसके बाद सांप के पिछले हिस्से में हल्की हलचल दिखाई दी। इस प्रतिक्रिया ने चिकित्सक को उम्मीद दी कि सर्जरी के जरिए उसकी जान बचाई जा सकती है। इसके बाद घायल सांप को डॉ. एस.पी. सिन्हा के क्लीनिक ले जाया गया, जहां ऑपरेशन की तैयारी की गई। सर्जरी के दौरान पहले घाव की सफाई की गई और 2 प्रतिशत जाइलोकैन से लोकल एनेस्थीसिया दिया गया। इसके बाद रीढ़ की टूटी हुई दोनों हड्डियों को सही स्थिति में लाने के लिए ड्रिल मशीन की मदद से स्पाइन में आवश्यक सूक्ष्म छेद किए गए।

हड्डियों को स्थिर रखने के लिए स्टेनलेस स्टील के पतले तार का इस्तेमाल किया गया। दोनों हिस्सों को तार से जोड़कर वर्टिब्रल कॉलम को स्थिर किया गया। इसके बाद मांसपेशियों और त्वचा को निर्जंतुक धागे से स्यूचर किया गया तथा घाव पर मलहम-पट्टी की गई। पूरी सर्जिकल प्रक्रिया करीब एक घंटे चली और इसमें 12 टांके लगाए गए। गंभीर चोट के बावजूद ऑपरेशन के बाद सांप की हालत में सुधार देखने को मिला और उसके शरीर के प्रभावित हिस्से में धीरे-धीरे गतिविधि लौटने लगी।

यह घटना इसलिए भी खास मानी गई क्योंकि आमतौर पर सांपों के इलाज के लिए इस तरह की जटिल सर्जिकल प्रक्रिया बेहद असामान्य है। चिकित्सकीय प्रयास के बाद अहिराज को निगरानी में रखा गया। तीन दिन बाद उसकी स्थिति सामान्य होने पर उसे प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। इस घटना ने यह भी दिखाया कि घायल वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और समय पर उपचार से उनके जीवन को बचाया जा सकता है।

अहिराज सहित सांपों को लेकर लोगों में अक्सर डर और गलत धारणाएं देखने को मिलती हैं, जबकि वे पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे मामलों में घायल सांप को खुद पकड़ने या उपचार करने के बजाय प्रशिक्षित सर्पमित्र, वन विभाग या संबंधित विशेषज्ञों की मदद लेना सुरक्षित माना जाता है। छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण और वन क्षेत्र से जुड़े आधिकारिक संसाधनों की जानकारी छत्तीसगढ़ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है।

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan