कुरूद : कुरूद नगर के लिए गर्व का क्षण तब और खास बन गया जब बसंत साहु राष्ट्रपति सम्मान से दिल्ली में सम्मानित किए गए। यह उपलब्धि न केवल कला जगत के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि पूरे नगर और क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक क्षण भी है। सम्मान समारोह के बाद कुरूद के प्रथम नागरिक नगरपालिका अध्यक्ष मा. ज्योति भानु चन्द्राकर सहित कई जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने बसंत साहु जी का भव्य स्वागत कर उन्हें गुलदस्ता, साल-श्रीफल देकर सम्मानित किया।
बसंत साहु राष्ट्रपति सम्मान क्यों है विशेष?
कला, रचना और समर्पण की अद्वितीय मिसाल बसंत साहु जी की वर्षों की मेहनत और निष्ठा का प्रतीक है बसंत साहु राष्ट्रपति सम्मान। यह सम्मान किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि कला और संस्कृति के प्रति उनके योगदान को समर्पित होता है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन का काम करता है।
कुरूद नगर में हुआ भव्य स्वागत
कुरूद में बसंत साहु जी के स्वागत का माहौल किसी उत्सव से कम नहीं था। जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने मिलकर यह साबित किया कि जब नगर का कोई बेटा राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होता है, तो गर्व पूरी समाज का होता है।
प्रमुख उपस्थित जनप्रतिनिधि
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नगरपालिका अध्यक्ष मा. ज्योति चन्द्राकर
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विधायक प्रतिनिधि भानु चन्द्राकर
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जनप्रतिनिधि — मिथिलेश बैस, महेन्द्र गायकवाड़, राजकुमारी ध्रुव, कविता चन्द्राकर, रवि मानिकपुरी
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कुरूद वृहताकार सोसायटी अध्यक्ष प्रभात बैस
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प्रेस क्लब अध्यक्ष मूलचंद सिन्हा
सभी ने मिलकर बसंत साहु जी को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई प्रेषित की।
कला जगत के लिए प्रेरणा बने बसंत साहु
बसंत साहु जी को बसंत साहु राष्ट्रपति सम्मान मिलने से कला जगत में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। उनकी उत्कृष्ट कृतियाँ, समर्पण और रचनात्मकता युवा कलाकारों के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं।
उनका कहना है कि कला केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि आत्मा की उड़ान है, जो सीमाओं से परे जाकर इंसान को नई ऊँचाइयाँ देती है।
सम्मान का महत्व और भविष्य में संभावनाएँ
राष्ट्रपति सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि यह दर्शाता है कि राष्ट्र प्रतिभाओं को पहचानता और प्रोत्साहित करता है। इस सम्मान से निश्चित ही कुरूद नगर के युवा कलाकार प्रेरित होंगे और कला क्षेत्र में नए प्रयोग देखने को मिलेंगे।
कुरूद नगर में बसंत साहु राष्ट्रपति सम्मान एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया है। यह सम्मान न केवल बसंत साहु जी के समर्पण की पहचान है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। उनकी कला यात्रा और सफलता युवाओं को नई दिशा दिखाती है। आने वाले वर्षों में भी इस सम्मान का असर कुरूद की कला संस्कृति पर सकारात्मक रूप से देखने को मिलेगा।







