छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन के बैनर तले तीन दिवसीय हड़ताल, शासकीय दफ्तरों में ठप रहा काम

कुरुद में छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन का जोरदार प्रदर्शन

कुरुद — छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन के आह्वान पर प्रदेशभर में कर्मचारियों ने तीन दिवसीय सामूहिक अवकाश लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार धरना प्रदर्शन शुरू किया। इस आंदोलन का उद्देश्य “मोदी की गारंटी” को लागू करने सहित कर्मचारियों की 11 सूत्रीय लंबित मांगों की पूर्ति कराना है। फेडरेशन के बैनर तले किए जा रहे इस प्रदर्शन का असर कुरुद ब्लॉक में साफ तौर पर देखने को मिला, जहां लगभग सभी शासकीय कार्यालयों में कामकाज ठप रहा।

सिविल अस्पताल, नगर पालिका, राजस्व विभाग और पंचायत कार्यालयों में कर्मचारी अनुपस्थित रहे, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोग अपने जरूरी कार्यों के लिए दफ्तरों के चक्कर काटते नजर आए।

इनडोर स्टेडियम के सामने धरना, सरकार पर उपेक्षा का आरोप

छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने इनडोर स्टेडियम के सामने तंबू लगाकर निश्चितकालीन हड़ताल शुरू की। धरने को संबोधित करते हुए कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार लंबे समय से उनकी जायज मांगों को नजरअंदाज कर रही है।

फेडरेशन के संयोजक अशोक निर्मलकर ने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। सचिव राजेश पाण्डेय और कोषाध्यक्ष ह्यूमन चंद्राकर ने भी कर्मचारियों को एकजुट रहने का आह्वान किया।

कर्मचारियों की प्रमुख 11 सूत्रीय मांगें
महंगाई भत्ता और वेतन विसंगतियों का मुद्दा

छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन की प्रमुख मांगों में केंद्र सरकार के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता लागू करना और एरियर्स की राशि कर्मचारियों के जीपीएस खाते में समायोजित करना शामिल है। इसके साथ ही चार स्तरीय समयमान वेतनमान और विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग की गई है।

पिंगुआ कमेटी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

फेडरेशन ने शिक्षकों, लिपिकों, स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य संवर्गों की समस्याओं के समाधान के लिए गठित पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी जोरदार मांग की।

नियमितीकरण और सेवा लाभों पर जोर

छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन ने प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना करते हुए संपूर्ण सेवा लाभ देने, पंचायत सचिवों के शासकीयकरण और दैनिक, अनियमित व संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए ठोस नीति बनाने की मांग उठाई है।

इसके अलावा सहायक शिक्षकों और सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों को तृतीय समयमान वेतनमान, नगरीय निकाय कर्मचारियों को नियमित मासिक वेतन तथा अनुकंपा नियुक्ति नियमों में 10 प्रतिशत सीलिंग में शिथिलीकरण की मांग भी शामिल है।

कैशलेस चिकित्सा और सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने की मांग

फेडरेशन ने प्रदेश में कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने, अर्जित अवकाश नगदीकरण की सीमा 300 दिवस करने और सभी विभागों में सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने की मांग को भी आंदोलन का अहम हिस्सा बताया।

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धरना प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कर्मचारी नेता शामिल

इस धरना प्रदर्शन में राजेंद्र चंद्राकर, देवेंद्र दादर, कुलेश्वर नाथ सिन्हा, गजेंद्र साहू, लक्ष्मण सिंह नरेटी, गोपाल साहू, वर्षा अग्रवाल, पुष्पलता बैस, मिथलेश कंवर सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी और पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में सरकार से कर्मचारियों की मांगों को शीघ्र पूरा करने की अपील की।

छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन के नेतृत्व में हो रहा यह तीन दिवसीय आंदोलन कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों को उजागर करता है। यदि सरकार समय रहते इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है, तो भविष्य में ऐसे आंदोलनों से बचा जा सकता है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन की इस एकजुट पहल से उन्हें उनका अधिकार और सम्मान अवश्य मिलेगा।

 

Bharti Sahu
Author: Bharti Sahu

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