डाही और डोमा में गुरु घासीदास जयंती समारोह का आयोजन, कविता योगेश बाबर रहीं मुख्य अतिथि

डाही व डोमा में श्रद्धा और उत्साह के साथ गुरु घासीदास जयंती समारोह

डाही/डोमा । ग्राम डोमा एवं ग्राम डाही में गुरु घासीदास जयंती समारोह का आयोजन श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक समरसता के वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य कविता योगेश बाबर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। गुरु घासीदास जयंती समारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं ध्वजारोहण के साथ की गई, जिसके बाद कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों, सतनामी समाज के सदस्यों एवं ग्रामीणों ने बाबा गुरु घासीदास को नमन किया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता ने आयोजन को भव्य और यादगार बना दिया।

मुख्य अतिथि कविता योगेश बाबर का संबोधन
सतनाम पंथ और सामाजिक समानता पर जोर

सभा को संबोधित करते हुए कविता योगेश बाबर ने समस्त सतनामी समाज एवं ग्रामवासियों को गुरु घासीदास जयंती समारोह की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि परम पूज्य बाबा गुरु घासीदास का जन्म छत्तीसगढ़ के पवित्र गिरौदपुरी गांव में हुआ था। वे अत्यंत गरीब परिवार में जन्मे, लेकिन अपने विचारों और कर्मों से समाज में क्रांति का सूत्रपात किया।

उन्होंने बताया कि बाबा गुरु घासीदास ने सामाजिक कुरीतियों, पशु बलि और छुआछूत जैसी अमानवीय प्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाई और सतनाम संप्रदाय की स्थापना की।

“मनखे-मनखे एक समान” का संदेश आज भी प्रासंगिक

गुरु घासीदास जयंती समारोह के दौरान कविता योगेश बाबर ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास का “मनखे-मनखे एक समान” का नारा आज भी समाज को समानता और भाईचारे का संदेश देता है। सतनाम धर्म प्रत्येक मानव को समान अधिकार और सम्मान देता है, जहां कोई छोटा या बड़ा नहीं होता।

उन्होंने कहा कि सतनाम धर्म, सनातन धर्म का ही एक स्वरूप है, जो मानवता, सत्य और करुणा पर आधारित है। बाबा के विचारों को अपनाकर ही समाज में सच्ची समानता और सद्भाव स्थापित किया जा सकता है।

सतनामी समाज की एकजुटता का प्रतीक बना आयोजन

गुरु घासीदास जयंती समारोह में सतनामी समाज की एकजुटता और सामाजिक चेतना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। इस अवसर पर पूर्व जनपद सदस्य दयाराम साहू, वर्तमान जनपद सदस्य फगेश्वरी साहू, सरपंच डोमा गुंजन साहू, दयालाल साहू, पूर्व सरपंच लक्ष्मीकांत बंजारे, मोतीलाल मरकाम, सुकलाल सोनवानी, हेमलाल साहू, पंचम साहेब, पंच गौरी ओझा, उपसरपंच अनिता तारक सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सतनामी समाज के सदस्य एवं ग्रामवासी शामिल हुए, जिससे आयोजन की गरिमा और बढ़ गई।

सामाजिक समरसता और जागरूकता का मंच

ऐसे गुरु घासीदास जयंती समारोह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक होते हैं, बल्कि समाज में जागरूकता, समानता और भाईचारे को भी मजबूत करते हैं। बाबा गुरु घासीदास के विचार आज के समय में भी सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में मार्गदर्शक हैं।

बाबा गुरु घासीदास का ऐतिहासिक योगदान

बाबा गुरु घासीदास छत्तीसगढ़ के महान समाज सुधारकों में से एक माने जाते हैं। उन्होंने सतनाम पंथ की स्थापना कर समाज को सत्य, अहिंसा और समानता का मार्ग दिखाया।

डाही और डोमा में आयोजित गुरु घासीदास जयंती समारोह सामाजिक एकता, समानता और बाबा गुरु घासीदास के विचारों को आत्मसात करने का एक सार्थक प्रयास रहा। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को बाबा के आदर्शों से जोड़ने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।गुरु घासीदास जयंती समारोह ने एक बार फिर “मनखे-मनखे एक समान” के संदेश को मजबूती से आगे बढ़ाया।

 

Bharti Sahu
Author: Bharti Sahu

यह भी देखें...