डांडेसरा में मखाना पौधरोपण: महिला स्व-सहायता समूहों को मिला आय का नया सशक्त माध्यम

धमतरी । जिले में ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ बनाने और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में डांडेसरा में मखाना पौधरोपण एक ऐतिहासिक पहल के रूप में सामने आया है। राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप स्थित ग्राम डांडेसरा की छोटी-छोटी डबरियों में मखाना खेती की औपचारिक शुरुआत महिला स्व-सहायता समूह शैलपुत्री एवं नई किरण की महिलाओं द्वारा की गई। इस नई फसल की शुरुआत से क्षेत्र में उत्साह और उम्मीद का माहौल देखने को मिल रहा है।

 महिला स्व-सहायता समूहों के लिए आय सृजन का नया अवसर

डांडेसरा में मखाना पौधरोपण से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आय का स्थायी साधन मिलने की संभावना है। इस पहल से पहले महिला समूहों को मखाना उत्पादन, फसल प्रबंधन और हार्वेस्टिंग से संबंधित तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया गया था। प्रशिक्षण के बाद अब महिलाएं आत्मविश्वास के साथ इस नई खेती को अपनाकर आर्थिक रूप से मजबूत बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

 प्रशिक्षण से बढ़ा महिलाओं का आत्मविश्वास

तकनीकी प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को मखाना की बुवाई, देखरेख, कटाई और भंडारण की पूरी जानकारी दी गई। डांडेसरा में मखाना पौधरोपण केवल खेती नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण का मजबूत उदाहरण बन रहा है।

 कलेक्टर ने किया निरीक्षण, महिलाओं का बढ़ाया उत्साह

कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा स्वयं ग्राम डांडेसरा पहुंचे और महिला समूहों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने डांडेसरा में मखाना पौधरोपण की शुरुआत पर महिलाओं को बधाई देते हुए कहा कि यह फसल क्षेत्र की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों के लिए अत्यंत उपयुक्त है।

कलेक्टर ने बताया कि मखाना की खेती के लिए केवल दो से तीन फीट पानी की आवश्यकता होती है और यह फसल लगभग छह माह में तैयार हो जाती है। उन्होंने इसे धान की तुलना में अधिक लाभकारी विकल्प बताया।

 मखाना – लाभकारी और पोषक फसल

डांडेसरा में मखाना पौधरोपण को आर्थिक ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कलेक्टर श्री मिश्रा ने बताया कि मखाना में—

  • विटामिन

  • फाइबर

  • कैल्शियम

  • मैग्नीशियम

  • आयरन

  • जिंक

प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे यह एक अत्यंत पौष्टिक आहार है। यही कारण है कि बाजार में मखाना की मांग लगातार बढ़ रही है और इसके अच्छे दाम किसानों और महिला समूहों को बेहतर लाभ दिला सकते हैं।

 धान का बेहतर विकल्प बन रहा मखाना

कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन का लक्ष्य मखाना को धान के बेहतर विकल्प के रूप में विकसित करना है। डांडेसरा में मखाना पौधरोपण इसी रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने तालाबों और जलस्रोतों को मखाना खेती के अनुकूल बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी अधिकारियों को दिए।

 मखाना बोर्ड में छत्तीसगढ़ को मिली जगह

कलेक्टर श्री मिश्रा ने जानकारी दी कि हाल ही में धमतरी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ को मखाना बोर्ड में शामिल करने की घोषणा की है। इससे राज्य में मखाना उत्पादन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और सहयोग मिलेगा।

इसके पहले ही कुरूद विकासखंड के ग्राम राखी, दरगहन और सरसोंपुरी को मखाना खेती के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया था, जहां उत्पादन प्रगति पर है और हार्वेस्टिंग भी प्रारंभ हो चुकी है। डांडेसरा में मखाना पौधरोपण इन सफल प्रयासों की अगली कड़ी है।

 जिले को मिलेगा नया आर्थिक पहचान

कार्यक्रम में उप संचालक उद्यानिकी श्रीमती पूजा कश्यप साहू, उप संचालक कृषि श्री मोनेश साहू, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रधान कृषि वैज्ञानिक डॉ. गजेन्द्र चन्द्राकर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल को धमतरी जिले के लिए मील का पत्थर बताया।

कुल मिलाकर, डांडेसरा में मखाना पौधरोपण धमतरी जिले में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला कदम है। महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी, प्रशासन का सहयोग और मखाना की बढ़ती मांग इस पहल को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। आने वाले समय में डांडेसरा में मखाना पौधरोपण जिले को मखाना उत्पादन के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित कर सकता है।

 

 

 

 

Bharti Sahu
Author: Bharti Sahu

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