कुरुद । कुरूद परिषद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। परिषद बैठक में लिए गए फैसलों के साथ छेड़छाड़ के आरोपों को लेकर कांग्रेसी पार्षदों का अनिश्चितकालीन धरना चौथे दिन भी जारी रहा। नगर पालिका कार्यालय के बाहर बैठे पार्षदों ने आरोप लगाया कि सीएमओ और अध्यक्ष की मिलीभगत से परिषद के निर्णयों को बदला जा रहा है और नगरहित की उपेक्षा की जा रही है। विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस जिला अध्यक्ष तारणी चंद्राकर, व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव हितेन्द्र केला और पूर्व नपं अध्यक्ष तपन चंद्राकर ने भी समर्थन देकर आंदोलन को मजबूती दी।
पार्षदों का आरोप—लोकतंत्र की हत्या, नगरहित को नुकसान
8 दिसंबर से जारी धरने में उपाध्यक्ष देवव्रत साहू, नेता प्रतिपक्ष डूमेश साहू, रजत चंद्राकर, मनीष साहू, मंजू साहू, राखी चंद्राकर, उत्तम साहू, उर्वशी चंद्राकर और अर्जुन ध्रुव सहित अन्य पार्षद शामिल हैं।
इनका कहना है कि कुरूद परिषद विवाद केवल संगठनात्मक मतभेद नहीं है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ खिलवाड़ है।
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परिषद में लिए गए फैसलों में बदलाव किए जा रहे हैं
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महत्वपूर्ण प्रस्तावों को दबाया या बदला जा रहा है
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शिकायतों के बाद भी सक्षम अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे
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नगरहित को नुकसान पहुँचाने वाले निर्णय थोपे जा रहे हैं
विपक्ष का कहना है कि सुनवाई न होने पर वे सड़क पर उतरने को मजबूर हुए हैं और उनकी मांगें पूरी होने तक धरना जारी रहेगा।
कांग्रेस संगठन का खुला समर्थन
जिला कांग्रेस अध्यक्ष का बयान
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बिना एजेण्डा पास किए फैसले लागू किए जा रहे हैं
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दुकान तोड़ने और कार्यालय स्थानांतरण जैसे निर्णय जल्दबाजी में लिए जा रहे हैं
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बहुमत आधारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा
उन्होंने कहा कि कुरूद परिषद विवाद केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि नगरहित का मामला है और पार्टी अपने पार्षदों के साथ खड़ी है।
“विकास का विरोध नहीं, गलत नीतियों का विरोध”—हितेन्द्र केला
कांग्रेस व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव हितेन्द्र केला ने कहा कि कांग्रेस विकास के खिलाफ नहीं है, लेकिन कुछ व्यक्तियों को लाभ पहुँचाने और जनता के हितों को नुकसान पहुँचाने वाली नीतियों का विरोध करना जरूरी है।
नगर पालिका कार्यालय को नगर से बाहर शिफ्ट करने की योजना पर उन्होंने कहा कि भाजपा चाहे तो जनमत संग्रह कराकर जनता की राय ले सकती है। इससे स्थिति साफ हो जाएगी।
काली पट्टी बांधकर विरोध, दिनभर लगे नारे
बुधवार को पार्षदों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। दिनभर मंच से सत्ता पक्ष के कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप माइक पर उजागर किए गए। आंदोलन स्थल पर कई स्थानीय नेता और नागरिक भी पहुंचे।
प्रमोद साहू, नरेंद्र सोनवानी, महिम शुक्ला, मिलन साहू, चंद्रप्रकाश देवांगन, चुम्मन दीवान, मनोज अग्रवाल, गोकुल साहू, तुकेश साहू, पप्पू राजपूत और संतोष प्रजापति सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
नगर पालिका अध्यक्ष ने दिए सफाई, कहा–“आरोप निराधार”
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9 महीने में 3 परिषद बैठकें आमराय से संपन्न हुईं
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सभी निर्णय सर्वसम्मति और जनहित में लिए गए
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नगरहित और विकास की परंपरा को कायम रखा गया है
उन्होंने अपील की कि विपक्ष अपनी जिद छोड़कर विकास के लिए साथ आए और कुरूद परिषद विवाद को समाप्त करे।
कुरूद परिषद विवाद में समाधान की जरूरत
कुल मिलाकर, कुरूद परिषद विवाद अब राजनीतिक से बढ़कर प्रशासनिक और जनहित का मुद्दा बन गया है। पार्षदों का धरना लगातार जारी है और दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ खड़े हैं। ऐसे में नगरहित में बेहतर है कि सभी पक्ष वार्ता कर समाधान निकालें, ताकि विकास कार्य बिना रुकावट आगे बढ़ सकें।







