कुरुद । कुरूद कचरा प्रबंधन परियोजना को मजबूत बनाने और नगर को स्वच्छ व व्यवस्थित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 96.28 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के अंतर्गत यह स्वीकृति नगरपालिका क्षेत्र में गीले एवं सूखे कचरे के प्रसंस्करण संयंत्र की स्थापना, मौजूदा संयंत्रों के उन्नयन और पांच साल तक संचालन-संधारण के लिए दी गई है। अध्यक्ष ज्योति चंद्राकर ने इस उपलब्धि का श्रेय मोदी की गारंटी, विष्णु देव साय के सुशासन और विधायक अजय चंद्राकर के विकासपरक दृष्टिकोण को दिया।
96.28 लाख की स्वीकृति से बदलेगी कुरूद की तस्वीर
कुरूद कचरा प्रबंधन परियोजना के लिए मिली यह बड़ी राशि नगर में कचरा समस्याओं का स्थायी समाधान लेकर आएगी। नगरपालिका की ओर से कचरा प्रबंधन हेतु पहले से भेजे गए प्रस्ताव में राइसमिल एरिया स्थित 4 एकड़ जमीन पर मनीकंचन केंद्र, मशीन स्थापना और अन्य सुविधाओं के विस्तार की मांग की गई थी।
5 दिसंबर को केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेश के बाद:
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आधुनिक कचरा प्रोसेसिंग मशीनें लग सकेंगी
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मौजूदा संयंत्रों का उन्नयन होगा
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कचरा डंपिंग की समस्या कम होगी
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नगर की स्वच्छता व्यवस्था तकनीकी रूप से मजबूत होगी
“तेज़ गति से काम कर रही है परिषद” — नगरपालिका अध्यक्ष
नगरपालिका अध्यक्ष ज्योति चंद्राकर ने कहा कि परिषद पिछले नौ महीनों से गति और प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।
उन्होंने कहा:
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यह स्वीकृति कुरूद कचरा प्रबंधन परियोजना को नई दिशा देगी
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जल्द ही कचरा डंपिंग की समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी
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कुरूद की सुंदरता और स्वच्छता में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा
उन्होंने यह भी बताया कि विधायक अजय चंद्राकर के मार्गदर्शन में नगर में विभिन्न नई योजनाएं आकार ले रही हैं।
विकास कार्यों में जनप्रतिनिधियों की भूमिका
इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों—भानु चंद्राकर, मिथिलेश बैस, महेंद्र गायकवाड़, राजकुमारी ध्रुव, रवि मानिकपुरी, कविता चंद्राकर और पूर्व पार्षद मूलचंद सिन्हा—ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से नगर की विकास गति बढ़ी है।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि कुरूद कचरा प्रबंधन परियोजना से न केवल स्वच्छता सुधरेगी बल्कि रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।
केंद्र सरकार द्वारा दी गई 96.28 लाख की स्वीकृति से कुरूद कचरा प्रबंधन परियोजना में तेजी आएगी और नगर की स्वच्छता व्यवस्था एक नए स्तर पर पहुंचेगी। यह कदम कुरूद के विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।







