मगरलोड फूड पॉइजनिंग जांच: प्रशासन ने 70 स्ट्रीट फूड नमूनों की की ऑन-द-स्पॉट टेस्टिंग

कुरुद । मगरलोड फूड पॉइजनिंग जांच को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 29 नवंबर से 2 दिसंबर के बीच 18 मरीजों में पेट दर्द, उल्टी-दस्त के मामले सामने आने के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए स्ट्रीट फूड वेंडर्स के खाद्य पदार्थों की जांच कराई। इसी क्रम में रायपुर संभाग मुख्यालय से चलित खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला धमतरी पहुंची, जहाँ मगरलोड फूड पॉइजनिंग जांच के तहत कुल 70 खाद्य नमूनों की ऑन-द-स्पॉट टेस्टिंग की गई।

 70 में से 66 नमूने मानक स्तर के, 4 नमूने अवमानक पाए गए

खाद्य सुरक्षा अधिकारी फणेश्वर पिथौरा ने बताया कि मगरलोड फूड पॉइजनिंग जांच अभियान के दौरान कुल 70 नमूनों की जांच की गई, जिनमें से 66 नमूने मानक पाए गए। जबकि 4 नमूनों में गड़बड़ियाँ पाई गईं।
अवमानक नमूनों में—

  • आलू मसाले में हानिकारक रंग का उपयोग

  • सड़े हुए संतरे का प्रयोग

  • बालूशाही और समोसे में सड़क की धूल की मात्रा
    जैसी खामियाँ मिलीं।
    इन खाद्य पदार्थों को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया।

 मोमोज खाने से 18 मरीज भर्ती—जांच के बाद प्रशासन हरकत में
 स्वास्थ्य अधिकारी की रिपोर्ट ने खोली पोल

मगरलोड ब्लॉक के स्वास्थ्य अधिकारी ने जिला स्तर पर सूचना भेजी कि मेघा में सड़क किनारे बिकने वाले मोमोज़ खाने के बाद लोगों को फूड पॉइजनिंग के लक्षण दिखे।
रिपोर्ट के अनुसार 29 नवंबर से 2 दिसंबर के बीच 18 मरीज पेट दर्द, उल्टी और दस्त की समस्या लेकर अस्पताल पहुंचे।

यह मामला सामने आते ही प्रशासन सक्रिय हुआ और मगरलोड फूड पॉइजनिंग जांच को लेकर ब्लॉक और जिला—दोनों स्तर पर त्वरित कार्रवाई की गई।

 स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को दिए गए विशेष निर्देश

जांच टीम ने मौके पर ही स्ट्रीट फूड वेंडर्स को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए—

  • भोजन को नियंत्रित तापमान पर रखें

  • फूड सर्व करने में अखबार का उपयोग न करें

  • आसपास एवं व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखें

  • खाद्य निर्माण में केवल ताज़ी सामग्री का उपयोग करें

  • खुली जगहों में धूल से बचाव के उचित प्रबंध करें

मगरलोड फूड पॉइजनिंग जांच के दौरान यह भी पाया गया कि कई विक्रेता इन मूलभूत मानकों का पालन नहीं कर रहे थे।

 8 से 12 दिसंबर तक सभी ब्लॉकों में होगी आकस्मिक जांच

अभिहित अधिकारी सर्वेश यादव ने बताया कि चलित खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला 8 से 12 दिसंबर तक जिला मुख्यालय सहित तीन ब्लॉकों में स्ट्रीट फूड की आकस्मिक जांच करेगी।
जो भी नमूने मानक स्तर पर खरे नहीं उतरेंगे, उनके खिलाफ Food Safety and Standards Act (FSSAI) के तहत कार्रवाई होगी।

 निगरानी के अभाव में बढ़ रहा जोखिम

जाने-माने तथ्य है कि विभाग की सतत निगरानी न होने के कारण—

  • कई होटल

  • ढाबे

  • और स्ट्रीट वेंडर्स

स्वास्थ्य मानकों का पालन नहीं करते हैं। यही वजह है कि लोगों में फूड पॉइजनिंग के मामले बढ़ते जा रहे हैं।
त्योहारों के समय या कोई बड़ी घटना होने पर ही विभाग की सक्रियता देखी जाती है, जबकि आम दिनों में स्थिति लापरवाह रहती है।

अधिकांश जगहों पर कमर्शियल सिलेंडर के बजाय घरेलू सिलेंडर का उपयोग भी खुलेआम होता मिला, जो सुरक्षा के लिहाज से बड़ी चूक है।
इस रिपोर्ट ने मगरलोड फूड पॉइजनिंग जांच की आवश्यकता को और अधिक मजबूती से साबित किया है।

मगरलोड फूड पॉइजनिंग जांच ने यह साफ कर दिया है कि स्ट्रीट फूड की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर तत्काल सख्ती ज़रूरी है। जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण और मानकों का पालन अनिवार्य है। यह घटना प्रशासन और फूड वेंडर्स दोनों के लिए चेतावनी है। बेहतर निगरानी से ही ऐसे मामलों को रोका जा सकता है और मगरलोड फूड पॉइजनिंग जांच जैसे अभियान वास्तविक सुधार ला सकते हैं।

 

Bharti Sahu
Author: Bharti Sahu

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