नगरी । नगरी बोराई अंतिम संस्कार विवाद ने धमतरी जिले के नगरी ब्लॉक में सामाजिक और धार्मिक तनाव की स्थिति पैदा कर दी है। ग्राम बोराई में एक महिला के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर विवाद खड़ा हो गया। मृतका द्वारा कुछ वर्ष पूर्व ईसाई धर्म अपनाए जाने के कारण अंतिम संस्कार की जगह को लेकर ग्रामीणों और स्थानीय निवासियों के बीच तीखी असहमति सामने आई है, जिससे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया है।
ग्राम बोराई से शुरू हुआ अंतिम संस्कार विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बोराई की निवासी महिला ने कुछ साल पहले हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपना लिया था। महिला के निधन के बाद परिजन जब अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे, तब गांव के कुछ लोगों ने गांव की सीमा के भीतर शव को दफनाने का कड़ा विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि धर्म परिवर्तन के बाद गांव की पारंपरिक भूमि पर अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं दी जा सकती।
यहीं से नगरी बोराई अंतिम संस्कार विवाद ने गंभीर रूप लेना शुरू कर दिया। विरोध कर रहे ग्रामीणों और मृतका के परिजनों के बीच कहासुनी बढ़ती चली गई, जिससे गांव में तनाव की स्थिति बन गई।
गांव से नगरी तक पहुंचा विवाद
स्थिति बिगड़ती देख परिजन शव को नगरी ले आए, जहां प्रशासन की मौजूदगी में अंतिम संस्कार के लिए वैकल्पिक स्थान तलाशा गया। नगरी में गड्ढा खोदने की तैयारी शुरू हुई, लेकिन जैसे ही यह खबर स्थानीय निवासियों तक पहुंची, वहां भी विरोध के स्वर उठने लगे।
नगरी के लोगों ने स्पष्ट कहा कि शहर की सीमा के भीतर शव दफनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस तरह नगरी बोराई अंतिम संस्कार विवाद गांव से निकलकर नगरी कस्बे तक फैल गया और मामला और अधिक पेचीदा हो गया।
प्रशासन के सामने खड़ी हुई बड़ी चुनौती
विवाद की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे। दोनों पक्षों को समझाने और शांतिपूर्ण समाधान निकालने के लिए घंटों बातचीत की गई। प्रशासन का प्रयास रहा कि मृतका का अंतिम संस्कार सम्मानजनक तरीके से हो और कानून-व्यवस्था भी प्रभावित न हो।
हालांकि, समाचार लिखे जाने तक किसी ठोस सहमति पर सहमति नहीं बन पाई थी। नगरी बोराई अंतिम संस्कार विवाद प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है, क्योंकि इसमें धार्मिक भावनाएं और सामाजिक परंपराएं दोनों जुड़ी हुई हैं।
कांकेर की घटना ने बढ़ाई प्रशासन की चिंता
उल्लेखनीय है कि इससे पहले कांकेर जिले के आमाबेड़ा गांव में भी धर्म परिवर्तन और अंतिम संस्कार को लेकर इसी तरह का विवाद सामने आ चुका है। उस मामले में बाद में स्थिति उग्र हो गई थी। पुराने अनुभवों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन इस बार अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।
अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो नगरी बोराई अंतिम संस्कार विवाद भी कानून-व्यवस्था की गंभीर समस्या बन सकता है।
वर्तमान स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था
फिलहाल पूरे क्षेत्र में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। पुलिस बल को गांव और नगरी दोनों स्थानों पर तैनात किया गया है। प्रशासन लगातार दोनों पक्षों से संवाद कर रहा है और शांतिपूर्ण समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है, ताकि शव का सम्मानजनक अंतिम संस्कार हो सके।
प्रशासन का कहना है कि कानून के दायरे में रहकर ही निर्णय लिया जाएगा और किसी भी पक्ष को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
धर्म परिवर्तन और अंतिम संस्कार पर कानून की स्थिति
भारत में धर्म परिवर्तन और अंतिम संस्कार से जुड़े मामलों में स्थानीय परंपराओं के साथ-साथ प्रशासनिक नियमों का भी महत्व होता है।
नगरी बोराई अंतिम संस्कार विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि धर्म परिवर्तन के बाद अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर समाज और प्रशासन को मिलकर संतुलित समाधान निकालना होगा। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता शांति बनाए रखने और मृतका के सम्मानजनक अंतिम संस्कार को सुनिश्चित करने की है। आने वाले समय में इस नगरी बोराई अंतिम संस्कार विवाद का समाधान किस दिशा में जाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।







