कुरुद । मगरलोड ब्लॉक के खिसोरा गांव में शुरू किया गया पराली दान अभियान ग्रामीणों और किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। सरपंच राखी साहू की पहल पर आयोजित इस अभियान में बुडेनी हायर सेकेंडरी स्कूल के रासेयो छात्रों ने सात दिवसीय शिविर के दौरान स्वच्छता, नशामुक्ति और स्वास्थ्य शिक्षा के साथ-साथ पराली दान अभियान को प्रमुख रूप से आगे बढ़ाया। इस दौरान किसानों को पराली को जलाने के बजाय दान करने के लिए प्रेरित किया गया, जिससे पर्यावरण संरक्षण और पशुधन प्रबंधन दोनों को बल मिल सके।
सात दिवसीय शिविर में रासेयो छात्रों ने किया जनजागरण
ग्राम पंचायत खिसोरा में आयोजित शिविर में रासेयो छात्रों ने घर–घर जाकर ग्रामीणों को पराली के दान और इसके लाभों के बारे में समझाया।
सरपंच संघ अध्यक्ष राखी साहू ने कहा कि पराली दान अभियान से न केवल वायु प्रदूषण कम होता है, बल्कि इससे गौठानों में पशु चारे की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने बताया कि व्यवहारिक ज्ञान और सामाजिक जिम्मेदारी, रासेयो गतिविधियों का मुख्य हिस्सा है, और यह शिविर उसी का उदाहरण है।
पराली दान से पर्यावरण और मिट्टी दोनों को लाभ
साहू ने कहा कि पराली जलाने से हवा में जहरीले कण तेजी से बढ़ते हैं और खेत की मिट्टी की उर्वरता भी कम होती जाती है।
लेकिन पराली दान अभियान के माध्यम से—
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वायु प्रदूषण में कमी
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गौठानों को पशु चारे की उपलब्धता
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जैविक खाद निर्माण में सहयोग
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मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार
जैसे बड़े फायदे ग्रामीण क्षेत्रों में देखे जा रहे हैं।
66 ग्राम पंचायतों में चलाया जा रहा है पराली दान अभियान
सरपंच संघ अध्यक्ष राखी साहू ने जानकारी दी कि मगरलोड ब्लॉक के सभी 66 ग्राम पंचायतों में पराली दान अभियान सक्रिय रूप से चलाया जा रहा है।
स्थानीय समितियों और पंचायत प्रतिनिधियों की मदद से किसानों को खेतों में पराली न जलाने और दान के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
उन्होंने रासेयो टीम और ग्रामीणों की मदद से गांव के गौठान के लिए कई ट्रैक्टर पराली एकत्र करवाई। यह अभियान क्षेत्र में एक सफल मॉडल के रूप में उभर रहा है।
पराली दान को लेकर बढ़ रहा है उत्साह और सम्मान
खिसोरा और आसपास के गांवों में पराली दान को लेकर सकारात्मक माहौल बन चुका है।
पराली दान करने वाले किसानों को कई जगह सम्मानित भी किया जा रहा है, जिससे किसानों में उत्साह और अधिक बढ़ रहा है। इससे आगजनी की घटनाओं में कमी आई है और खेत की मिट्टी की उर्वरता भी सुधर रही है।
कुरुद क्षेत्र में भी शुरू हुई पहल
कुरुद नगर पालिका परिषद ने भी किसानों से पराली जलाने की बजाय दान करने की अपील की है। विधायक प्रतिनिधि भानु चन्द्राकर ने बताया कि जल्द ही गौशाला में पराली संग्रह के लिए वाहन और उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। यह कदम पराली दान अभियान को और उच्च स्तर पर ले जाएगा।
पर्यावरण प्रेमियों ने बताया बड़ा कदम
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पराली दान अभियान—
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पर्यावरण संरक्षण
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टिकाऊ कृषि
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ग्रामीण स्वच्छता
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हरित विकास
जैसे लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।
अंत में कहा जा सकता है कि पराली दान अभियान ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक पर्यावरण-friendly और टिकाऊ समाधान साबित हो रहा है। यह न केवल किसानों को लाभ दे रहा है, बल्कि गांवों में स्वच्छता, जागरूकता और सामाजिक सहभागिता भी बढ़ा रहा है। आने वाले समय में पराली दान अभियान बड़े कृषि क्षेत्रों में एक सफल मॉडल बन सकता है।







