कुरूद। कुरुद में रमजान का पाक महीना पूरे जोश और श्रद्धा के साथ मनाया गया। मुस्लिम भाईयों ने पूरी पाबंदी के साथ रोजे रखे और नमाज़ अदा की। घर के बड़े बुजुर्गों के साथ-साथ बच्चों ने भी इस्लामिक फर्ज को निभाने में कोई कमी नहीं छोड़ी। किसी ने पूरे रोजे रखे, तो किसी ने आधे और किसी ने थोड़े-से, लेकिन सभी ने अपनी श्रद्धा और समर्पण का परिचय दिया।
रमजान की समाप्ति पर ईद के मौके पर घरवालों ने बच्चों को नए कपड़े और विभिन्न उपहार देकर उनका हौसला बढ़ाया। ज्ञात हो कि इस बार रमजान के रोजे 2 मार्च से प्रारंभ हुए थे, जिसमें बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी ने पूरी आस्था और निष्ठा के साथ रोजे रखे और नमाज़ अदा की। गर्मी के मौसम के बावजूद नन्हे-मुन्ने बच्चों ने भूख-प्यास की परवाह किए बिना रोजे रखकर इस्लामिक परंपरा का पालन किया।

कुरुद की रहमत (पिता शेख ग्याशुद्दीन), आयत फ़ातिमा (सलीम गोरी), आईज़ा निगार (इमरान बेग), आक्सां, असफिया (अमीन हलारी), रीदा बानो (वाजिद अली), अशफी नूरी (शरफराज शेख), आलिजा (रिज़वान हालारी), आफ़िया (वसीम हालारी) ने रमजान के दौरान पूरे समर्पण के साथ रोजे रखे। इसी प्रकार, स्टार परिवार नगरी के जैनब फ़ातिमा (नोमान रज़ा), इरफ़ान रज़ा, मो. खूबैब (सलमान रज़ा) ने भी रोजे और नमाज़ की इबादत कर रमजान के इस मुबारक महीने को बिताया।
बच्चों के दादा शेख युनूस, हाजी सुलेमान हलारी, सलाम निर्बाण ने बताया कि घर के माहौल का बच्चों के बाल मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। जब बच्चे अपने बड़ों को रोजे और नमाज़ अदा करते देखते हैं, तो उनके मन में भी इबादत का जज़्बा उत्पन्न होता है। यह बड़ों की ज़िम्मेदारी है कि वे ऐसे मासूम बच्चों का हौसला बढ़ाएं और उन्हें प्रेरित करें ताकि वे भी अपने धर्म और परंपराओं का पालन पूरी श्रद्धा के साथ कर सकें।
रमजान का यह पाक महीना कुरुद में आपसी भाईचारे और धार्मिक श्रद्धा का संदेश देकर समाप्त हुआ, जिसमें हर उम्र के मोमिनों ने अपनी आस्था को प्रकट किया और रमजान के पाक माह को इबादत और समर्पण के साथ गुज़ारा।







