स्व. लखन लाल साहू नेत्रदान: ग्राम नारी से मानवता की अमर मिसाल, दो नेत्रहीनों को मिलेगी नई रोशनी

 कुरुद। स्व. लखन लाल साहू नेत्रदान की घटना न केवल ग्राम नारी बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए मानवता, संवेदनशीलता और परोपकार की एक प्रेरणादायक मिसाल बन गई है। समाजसेवी एवं प्रतिष्ठित नागरिक स्वर्गीय लखन लाल साहू (79 वर्ष) ने अपने जीवन के बाद भी दूसरों के जीवन में उजाला फैलाने का जो संकल्प लिया, वह आज समाज के लिए एक आदर्श बन चुका है। उनके मरणोपरांत नेत्रदान से दो नेत्रहीन व्यक्तियों को नई दृष्टि मिलने की उम्मीद जगी है।

🟢 जीवनकाल में लिया गया था नेत्रदान का संकल्प

स्व. लखन लाल साहू नेत्रदान की सबसे प्रेरक बात यह है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में ही नेत्रदान का संकल्प लिया था। वे समाजसेवा और मानवीय मूल्यों में गहरी आस्था रखते थे। उनका मानना था कि मृत्यु के बाद शरीर का सदुपयोग होना चाहिए ताकि किसी जरूरतमंद के जीवन में बदलाव आ सके। यही सोच उन्हें एक असाधारण नागरिक बनाती है।

🟡 परिजनों ने निभाया पुण्य संकल्प

स्व. लखन लाल साहू के निधन के पश्चात उनके परिजनों ने इस पुण्य संकल्प को पूरी निष्ठा और सम्मान के साथ पूरा किया। चिकित्सकों को बुलाकर विधिवत मरणोपरांत नेत्रदान कराया गया। स्व. लखन लाल साहू नेत्रदान के इस कार्य से दो नेत्रहीन व्यक्तियों को दृष्टि मिलने की संभावना बनी है, जो अपने आप में एक महान सेवा है।

🔵 क्षेत्र में जागरूकता की लहर

इस अनुकरणीय पहल के बाद पूरे क्षेत्र में नेत्रदान को लेकर जागरूकता की लहर दौड़ गई है। ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने स्व. लखन लाल साहू नेत्रदान को समाज के लिए प्रेरक बताते हुए भूरी-भूरी प्रशंसा की। लोगों का कहना है कि ऐसे उदाहरण समाज को सही दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।

🟣 परिवार ने आगे बढ़ाई सेवा की परंपरा

सेवा की यह परंपरा यहीं नहीं रुकी। स्व. लखन लाल साहू की धर्मपत्नी केजिन बाई साहू (72 वर्ष) ने भी नेत्रदान करने की घोषणा कर समाज के सामने एक सशक्त संदेश दिया कि सेवा और त्याग केवल व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे परिवार की साझा विरासत होती है। वहीं उनके परिजन नरेंद्र साहू एवं सरस्वती साहू ने भी नेत्रदान का संकल्प लेकर स्व. लखन लाल साहू नेत्रदान की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

✨ “मृत्यु अंत नहीं, बल्कि किसी के जीवन में उजाला बन सकती है”

स्व. लखन लाल साहू का यह कथन उनके जीवन दर्शन को दर्शाता है। नेत्रदान जैसे महादान से न केवल किसी को देखने की शक्ति मिलती है, बल्कि समाज में करुणा, संवेदना और मानवता का प्रसार होता है।

🧠 नेत्रदान क्यों है महादान?

भारत में लाखों लोग आज भी दृष्टिहीनता से पीड़ित हैं। नेत्रदान के माध्यम से कॉर्निया प्रत्यारोपण कर उन्हें नया जीवन दिया जा सकता है। भारत सरकार और स्वास्थ्य विभाग भी लगातार नेत्रदान को बढ़ावा दे रहे हैं।

🔗 नेत्रदान पर जागरूकता जरूरी

यदि समाज का हर व्यक्ति स्व. लखन लाल साहू नेत्रदान जैसे संकल्प को अपनाए, तो अंधकार में जी रहे असंख्य लोगों के जीवन में रोशनी लाई जा सकती है। स्व. लखन लाल साहू नेत्रदान से समाज को नई दिशा

अंततः कहा जा सकता है कि स्व. लखन लाल साहू नेत्रदान केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक अमर प्रेरणा है। उनका जीवन और नेत्रदान यह संदेश देता है कि इंसान मृत्यु के बाद भी दूसरों के जीवन में उजाला बन सकता है। यदि हम सभी इस सोच को अपनाएं, तो नेत्रदान जैसे महादान से समाज को एक नई, उज्ज्वल दिशा मिल सकती है।

 

Bharti Sahu
Author: Bharti Sahu

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