
बिलासपुर। भीषण गर्मी के बीच रक्सौल समर स्पेशल ट्रेन में तकनीकी खराबी के चलते यात्रियों को लंबी और परेशान करने वाली यात्रा का सामना करना पड़ा। गोंदिया से शनिवार सुबह 6:30 बजे रवाना हुई इस ट्रेन के एसी कोच बी1 और बी2 में कूलिंग सिस्टम पूरी तरह बंद हो गया, जिससे यात्रियों को करीब 8 घंटे तक उमस और गर्मी में सफर करना पड़ा। रास्ते में डोंगरगढ़, राजनांदगांव और दुर्ग जैसे प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों ने बार-बार शिकायत दर्ज कराई, लेकिन हर जगह उन्हें जल्द सुधार का आश्वासन देकर आगे बढ़ा दिया गया। ट्रेन जब रायपुर और भाटापारा होते हुए दोपहर 2:40 बजे बिलासपुर पहुंची, तब तक यात्रियों का धैर्य जवाब दे चुका था।
प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर ट्रेन रुकते ही यात्रियों ने आक्रोश जताते हुए हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान कोच में पानी की कमी और प्रसाधन की खराब स्थिति को लेकर भी नाराजगी सामने आई। स्थिति तब और बिगड़ गई जब पानी भरने के बाद ट्रेन आगे बढ़ने लगी और यात्रियों ने इमरजेंसी चेन खींचकर उसे रोक दिया। मौके पर पहुंचे आरपीएफ और रेलवे स्टाफ ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन जब तक तकनीकी समस्या दूर नहीं हुई, यात्री आगे जाने को तैयार नहीं थे। करीब आधे घंटे बाद पहुंचे मैकेनिकल स्टाफ ने जांच में पाया कि कोच की बैटरियां पूरी तरह डिस्चार्ज हो चुकी थीं, जिसके कारण एसी सिस्टम काम नहीं कर रहा था। मौके पर डायरेक्ट करंट के माध्यम से बैटरियों को चार्ज कर एसी को चालू किया गया, जिसके बाद यात्रियों को कुछ राहत मिली।
रेलवे अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि ट्रेन चलने के दौरान बैटरियां स्वतः चार्ज होती रहेंगी, लेकिन यात्रियों ने लिखित आश्वासन और मैकेनिक को साथ भेजने की मांग रखी। काफी देर तक चली बहस के बाद रेलवे प्रशासन को यात्रियों की मांग माननी पड़ी और दो मैकेनिकों को ट्रेन के साथ रवाना किया गया। इसके बाद ही यात्री शांत हुए और ट्रेन शाम 4:30 बजे बिलासपुर से आगे बढ़ सकी। पहले से करीब 3 घंटे देरी से चल रही ट्रेन इस घटना के बाद कुल 5 घंटे लेट हो गई। इस पूरे घटनाक्रम ने रेलवे की रखरखाव व्यवस्था और यात्रियों की सुविधा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों की सुविधा और शिकायत निवारण से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए https://indianrailways.gov.in/ पर संपर्क किया जा सकता है।







