रायपुर कला गोष्ठी में गूंजा संदेश, सच बोलने का साहस है कला

रायपुर। कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और दुनिया के सामने सच्चाई को निर्भीकता से प्रस्तुत करने का एक सशक्त जरिया है। राजधानी रायपुर में आयोजित एक कला चर्चा गोष्ठी में कलाकारों, शिक्षाविदों और कला प्रेमियों ने इस विचार को प्रमुखता से रखा। वक्ताओं ने कहा कि कला में वह साहस होता है जो कई बार शब्दों में व्यक्त नहीं हो पाता। कलाकार अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज की विसंगतियों, अन्याय, संवेदनाओं और संघर्षों को उजागर करते हैं, जिससे लोगों को सोचने और अपने नजरिए पर पुनर्विचार करने का अवसर मिलता है। इस दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि कला केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सच्चाइयों को सामने लाने का प्रभावी माध्यम भी है।

गोष्ठी में वरिष्ठ चित्रकारों ने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी रहा है कि जब-जब समाज में गलत हुआ, कला ने उसके खिलाफ आवाज उठाई। स्वतंत्रता संग्राम के पोस्टरों से लेकर आदिवासी जीवन की झलकियों और आधुनिक समय में पर्यावरण संरक्षण, महिला अधिकार तथा सामाजिक समानता जैसे मुद्दों तक, कला ने हर दौर में सवाल खड़े किए हैं और बदलाव की प्रेरणा दी है। युवा कलाकारों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि डिजिटल युग में तकनीक के विस्तार के बावजूद कला की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है, बल्कि नए माध्यमों के जरिए इसका प्रभाव और व्यापक हुआ है। उन्होंने कहा कि कला में संवाद की ऐसी शक्ति होती है, जो सीधे दिलों तक पहुंचती है और समाज को जोड़ने का काम करती है।

कार्यक्रम के दौरान स्थानीय कलाकारों की पेंटिंग, मूर्तिकला, कथक नृत्य और इंस्टॉलेशन कला की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे दर्शकों ने सराहा। आयोजकों ने बताया कि ऐसे आयोजन कलाकारों को मंच देने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कला के माध्यम से सामाजिक जागरूकता को मजबूती मिलती है और यह समाज में संवेदनशीलता विकसित करने का प्रभावी साधन बन सकती है। कला और संस्कृति से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए संस्कृति मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट https://www.culture.gov.in पर विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

 

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan