धान उठाव में लापरवाही से धमतरी की समितियों पर करोड़ों का संकट

धमतरी धमतरी जिले में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान के उठाव में देरी को लेकर राजनीति तेज हो गई है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष तारिणी नीलम चंद्राकर ने राज्य सरकार पर किसानों और सहकारी समितियों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि धान खरीदी के दौरान किसानों को पहले सीमित खरीदी और अव्यवस्था के कारण परेशान होना पड़ा, वहीं अब धान का समय पर उठाव नहीं होने से जिले की 74 सहकारी समितियां आर्थिक संकट में फंस गई हैं। उनका दावा है कि सरकार खरीदे गए धान का 72 घंटे के भीतर उठाव कराने में विफल रही, जिसके कारण धान में सूखत बढ़ी और समितियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कांग्रेस नेताओं के अनुसार जिले में करीब 35 हजार क्विंटल धान सूखत की चपेट में आया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब साढ़े 11 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस नुकसान का बोझ अब सहकारी समितियों पर आने की आशंका है। साथ ही शून्य शॉर्टेज की स्थिति में मिलने वाली 2 से 4 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि भी समितियों को नहीं मिल पाएगी। इससे समितियों की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो सकती है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की लापरवाही के कारण समितियां कर्ज में डूबने की कगार पर पहुंच गई हैं। पार्टी का कहना है कि धान उठाव और भंडारण व्यवस्था को लेकर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, जिसका सीधा असर किसानों और समितियों पर पड़ा है।

इधर प्रशासनिक स्तर पर मामले को लेकर निगरानी बढ़ा दी गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन वास्तविक स्थिति छिपाने के लिए सांठगांठ कर शून्य शॉर्टेज दिखाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि प्रशासन की ओर से अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कृषि और सहकारिता से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि समय पर धान उठाव और भंडारण की व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले समय में समितियों की वित्तीय स्थिति और बिगड़ सकती है। धान खरीदी और समर्थन मूल्य से जुड़ी जानकारी छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ पर देखी जा सकती है

 

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan