कुरूद। भारतमाला परियोजना के तहत निर्माणाधीन विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर एक बार फिर किसानों की परेशानियों को लेकर चर्चा में है। पहले मुआवजा और जल निकासी की समस्या को लेकर विवादों में रही यह सड़क परियोजना अब किसानों की खेतों तक पहुंच पर संकट बनती नजर आ रही है। ग्राम भरदा और आसपास के किसानों ने आरोप लगाया है कि कुरूद-राजिम मार्ग स्थित ओवरब्रिज के किनारे बनाई जा रही बाउंड्रीवॉल से खेतों तक जाने का पारंपरिक रास्ता बंद हो सकता है, जिससे खेती-किसानी का कार्य गंभीर रूप से प्रभावित होगा। इस संबंध में दर्जनों किसानों ने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
किसानों ने प्रशासन को बताया कि भारतमाला परियोजना के अंतर्गत बनने वाली विशाखापट्टनम सड़क के नीचे और किनारे मौजूद अतिरिक्त भूमि का उपयोग वर्षों से ग्रामीण बैलगाड़ी, ट्रैक्टर और पैदल आवाजाही के लिए करते आ रहे हैं। वर्तमान में जिस स्थान पर बाउंड्रीवॉल का निर्माण किया जा रहा है, वह ग्रामीणों और किसानों के लिए खेतों तक पहुंचने का प्रमुख मार्ग है। यदि इस रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया गया तो किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने के लिए करीब दो किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। किसानों का कहना है कि इससे न केवल समय और श्रम की बर्बादी होगी, बल्कि कृषि कार्य की लागत भी बढ़ जाएगी। ग्रामीणों ने यह भी आशंका जताई कि बरसात के मौसम में स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है, क्योंकि पहले से ही पानी निकासी की समस्या बनी हुई है।
कुहकुहा सरपंच रुपेश कुमार सहित प्रगतिशील कृषक लेखराज चंद्राकर, रामलाल, पुरण, शालिकराम, श्यामलाल, राजकुमार, सुशील, रामसिंह, सुरेंद्र चंद्राकर, मदन लाल, जनक और देवकुमार सहित कई किसानों ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि सड़क निर्माण के बाद भी अब तक कृषि कार्य सामान्य रूप से संचालित हो रहा था, लेकिन बाउंड्रीवॉल निर्माण से ग्रामीणों की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो सकती है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित स्थल पर कम से कम तीन मीटर चौड़ा रास्ता छोड़ा जाए, ताकि ट्रैक्टर और अन्य कृषि वाहन आसानी से गुजर सकें। किसानों का कहना है कि विकास कार्यों के साथ ग्रामीणों की मूलभूत जरूरतों और कृषि सुविधाओं का ध्यान रखना भी जरूरी है।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि भारतमाला जैसी बड़ी परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्रीय विकास और यातायात सुविधा बढ़ाना है, लेकिन यदि इससे स्थानीय किसानों और ग्रामीणों की दैनिक जरूरतें प्रभावित होती हैं तो प्रशासन को समय रहते समाधान निकालना चाहिए। फिलहाल एसडीएम कार्यालय ने किसानों की मांग पर संबंधित विभाग से रिपोर्ट लेने और मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है। परियोजना से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट NHAI Official Website पर जानकारी देखी जा सकती है।







