
कुरुद। धमतरी जिले के सीतानदी अभ्यारण क्षेत्र स्थित जैतपुरी गांव में वन भूमि अतिक्रमण और कथित अवैध कटाई को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। वन विभाग द्वारा 166 आदिवासियों पर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और वन भूमि पर कब्जे का आरोप लगाए जाने के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। मामले में स्थानीय आदिवासियों और वन अमले के बीच हुई झड़प के बाद अब कांग्रेस भी खुलकर आदिवासी परिवारों के समर्थन में सामने आ गई है। मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने धमतरी कलेक्टोरेट पहुंचकर प्रदर्शन किया, जिसमें कांग्रेस नेताओं ने भी भाग लिया और वन विभाग की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए।
जानकारी के अनुसार 18 मई को वन विभाग की टीम सीतानदी अभ्यारण क्षेत्र के जैतपुरी गांव में अतिक्रमण हटाने पहुंची थी। इस दौरान वन भूमि पर कब्जे को लेकर ग्रामीणों और वन अमले के बीच विवाद बढ़ गया। आरोप है कि कार्रवाई के दौरान दोनों पक्षों में हाथापाई और मारपीट की स्थिति बनी। वन विभाग ने दावा किया कि इलाके में लगभग एक लाख पेड़ों की कटाई की गई है और इसके लिए 166 लोगों को जिम्मेदार ठहराया गया है। वहीं ग्रामीणों ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए वन अमले पर घरों में घुसकर महिलाओं और पुरुषों के साथ मारपीट तथा दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया है। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का कहना था कि वे वर्षों से उस क्षेत्र में रह रहे हैं और उन्हें बेवजह प्रताड़ित किया जा रहा है।
आदिवासी परिवारों की शिकायत सुनने के बाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष तारणी चंद्राकर, धमतरी विधायक ओंकार साहू, सिहावा विधायक अंबिका मरकाम सहित कई नेताओं ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों का हनन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि एक ओर प्रदेश में बड़े उद्योग समूहों के लिए जंगलों की कटाई हो रही है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से जंगलों की रक्षा करने वाले आदिवासियों पर कठोर कार्रवाई की जा रही है। पूर्व विधायक लेखराम साहू ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन पर्यावरण संतुलन को प्रभावित कर रहा है और अब अचानक आदिवासियों पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।
वहीं इस पूरे मामले में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर अरुण जैन ने कहा कि रिमोट सेंसिंग पोर्टल और विभागीय जांच में जैतपुरी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वृक्ष कटाई के संकेत मिले हैं। उन्होंने बताया कि हालिया निरीक्षण में जंगल के भीतर बड़ी संख्या में कटे हुए पेड़ों के ठूंठ पाए गए हैं, जो अवैध कटाई की पुष्टि करते हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी पक्षों के तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस पूरे विवाद ने वन अधिकार, पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी हितों को लेकर जिले की राजनीति को गरमा दिया है। वन एवं पर्यावरण से जुड़ी अधिक जानकारी Ministry of Environment, Forest and Climate Change पर देखी जा सकती है।https://moef.gov.in?utm_source=chatgpt.com

