
रायपुर। छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव का कार्यक्रम घोषित हो गया है, लेकिन इस बार केवल ऑनलाइन मतदान के आधार पर ही नेतृत्व का फैसला नहीं होगा। प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री और जिला अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों के दावेदारों को चुनावी प्रक्रिया के बाद दिल्ली में राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष इंटरव्यू भी देना होगा। अंतिम चयन में संगठन की केंद्रीय इकाई की भूमिका अहम रहेगी, जिसके चलते चुनावी जीत के साथ नेतृत्व क्षमता और संगठनात्मक दृष्टि का मूल्यांकन भी किया जाएगा।
राजधानी रायपुर स्थित राजीव भवन में रविवार को भारतीय युवा कांग्रेस के मुख्य चुनाव आयुक्त जसप्रीत सिंह और प्रदेश चुनाव अधिकारी रोशन नेगी ने चुनाव कार्यक्रम जारी किया। घोषित कार्यक्रम के अनुसार ब्लॉक और जिला स्तर के पदों के लिए 29 मई से 13 जून तक नामांकन भरे जाएंगे, जबकि प्रदेश अध्यक्ष एवं प्रदेश कार्यकारिणी के लिए 11 जून से 13 जून तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 15 जून से 18 जून तक होगी, जिसके बाद सदस्यता अभियान और चुनाव प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से संचालित की जाएगी। चुनाव को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए प्रदेश को पांच जोन में विभाजित कर जोनल रिटर्निंग ऑफिसर (ZRO) नियुक्त किए जाएंगे।
युवा कांग्रेस ने सदस्यता और चुनाव लड़ने के लिए 18 से 35 वर्ष की आयु सीमा निर्धारित की है। फर्जी सदस्यता रोकने के लिए वोटर आईडी अनिवार्य की गई है। प्रत्येक आवेदक को आवेदन के साथ आठ सेकेंड का वीडियो अपलोड करना होगा, जिसमें उसे स्वयं अपनी पहचान और आवेदन संबंधी जानकारी देनी होगी। आयु सत्यापन के लिए दसवीं की अंकसूची, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट या अन्य वैध दस्तावेज स्वीकार किए जाएंगे। पूरी सदस्यता और शिकायत प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
चुनाव प्रक्रिया में “एक व्यक्ति-एक पद” का नियम भी लागू रहेगा। कोई भी उम्मीदवार केवल एक पद के लिए ही नामांकन दाखिल कर सकेगा और नया नामांकन भरते ही उसे पूर्व पद से मुक्त माना जाएगा। राजनीतिक दृष्टि से इस चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि शीर्ष नेतृत्व के चयन में केवल ऑनलाइन वोटिंग ही निर्णायक नहीं होगी। चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दावेदारों का दिल्ली में भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष इंटरव्यू लिया जाएगा, जिसके बाद अंतिम नेतृत्व तय होगा। इससे स्पष्ट है कि संगठन चुनावी जनसमर्थन के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता, संगठनात्मक अनुभव और वैचारिक प्रतिबद्धता को भी महत्व देने जा रहा है।
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