छत्तीसगढ़। खरीफ सीजन से पहले किसानों को समय पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराने और खाद वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से जनपद पंचायत सभा कक्ष मगरलोड में विकासखंड के समस्त उर्वरक विक्रेताओं की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अनुविभागीय अधिकारी कृषि मनोज सागर ने की। इस दौरान अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को उर्वरकों का वितरण फसलवार अनुशंसा और वास्तविक आवश्यकता के आधार पर ही किया जाए, ताकि खाद की उपलब्धता संतुलित बनी रहे और किसी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो।
बैठक में कृषि विभाग के अधिकारियों ने विशेष रूप से धान फसल के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित उर्वरक मात्रा की जानकारी साझा करते हुए कहा कि भूमि की उर्वरता और किसान की वास्तविक जरूरत के अनुसार ही यूरिया, डीएपी, सिंगल सुपर फास्फेट, म्यूरेट ऑफ पोटाश तथा एनपीके उर्वरकों का विक्रय किया जाना चाहिए। अधिकारियों ने नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया और कहा कि आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने से लागत में कमी और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। किसानों को उनके फसल रकबे के अनुरूप खाद उपलब्ध कराने के निर्देश देते हुए यह भी कहा गया कि किसी भी स्तर पर अनावश्यक भंडारण, अधिक मात्रा में विक्रय, कालाबाजारी या कृत्रिम कमी जैसी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अनुविभागीय अधिकारी कृषि मनोज सागर ने उर्वरक विक्रेताओं को शासन के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने की नसीहत देते हुए कहा कि किसानों को समय पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराना सभी विक्रेताओं की जिम्मेदारी है। उन्होंने वितरण रजिस्टर के नियमित संधारण और प्रतिदिन अद्यतन जानकारी रखने के निर्देश भी दिए। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के.एस. नरेटी, कृषि विकास अधिकारी संतोष राठिया, भागीरथी राठिया, आरएईओ रश्मि सूर्यवंशी, एटीएम संतोष बघेल, खिलेश साहू सहित कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और विकासखंड के उर्वरक विक्रेता उपस्थित रहे। किसानों के लिए उर्वरक प्रबंधन और कृषि संबंधी जानकारी के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की आधिकारिक जानकारी उपयोगी हो सकती है।







