कुरुद में आवारा कुत्तों और मवेशियों का आतंक, बढ़ते हादसों से दहशत में लोग

कुरुद। नगर की सड़कों और गलियों में लगातार बढ़ रही आवारा कुत्तों और खुले घूम रहे मवेशियों की संख्या अब आम नागरिकों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। बारिश के मौसम में हालात और अधिक चिंताजनक हो गए हैं, क्योंकि खुले स्थानों पर पानी भरने और जमीन गीली होने के कारण पशु सड़कों पर ही डेरा जमाए बैठे रहते हैं। इसके चलते सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है और डॉग बाइट की घटनाओं में भी वृद्धि दर्ज की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर में कई लोग इन हादसों में घायल हो चुके हैं, जबकि कुछ मामलों में जान भी गंवानी पड़ी है। नगर पालिका द्वारा आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए एजेंसी नियुक्त किए जाने के बावजूद अभियान अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका है, जिससे नागरिकों में असंतोष बढ़ रहा है।

नगर के प्रमुख मार्गों, कुरुद सांधा मार्ग, पुराना बस स्टैंड, सरोजनी चौक, पुराना बाजार, नया बाजार, मंडी पारा, गांधी चौक और पचरीपारा सहित कई इलाकों में आवारा कुत्तों और घरों से छोड़े गए मवेशियों का जमावड़ा रोजाना देखा जा सकता है। विशेष रूप से नया बाजार क्षेत्र में संचालित मांसाहारी दुकानों के आसपास कुत्तों के झुंड बड़ी संख्या में मौजूद रहते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कच्चे मांस के अवशेष मिलने के कारण कुत्तों का व्यवहार अधिक आक्रामक दिखाई देता है, जिससे पैदल चलने वाले, दोपहिया वाहन चालक, बुजुर्ग और स्कूली बच्चों के लिए यह मार्ग जोखिमपूर्ण बन गया है। वहीं सब्जी मंडी क्षेत्र में मवेशियों की लगातार मौजूदगी से यातायात प्रभावित होता है और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्थिति कम गंभीर नहीं है। गांवों में कुत्तों के झुंड किसानों और स्कूल जाने वाले बच्चों पर हमला कर रहे हैं, जबकि खुले घूम रहे मवेशी खेतों में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

पूर्व में गौठान और रोका-छेका जैसी योजनाओं के माध्यम से आवारा पशुओं की समस्या को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया था, लेकिन वर्तमान में नगर की सड़कों पर इस व्यवस्था का प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा है। कुछ समय पहले तक स्थानीय निकाय द्वारा सड़कों से मवेशियों को हटाने के लिए कर्मचारियों की तैनाती की गई थी, लेकिन अब यह व्यवस्था प्रभावी नहीं दिख रही। मुख्य नगर पालिका अधिकारी महेंद्र गुप्ता ने बताया कि नगर पालिका ने आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए एक एजेंसी की सेवाएं ली हैं। उनके अनुसार पिछले एक महीने में लगभग 26 से 27 कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है और अभियान आगे भी जारी रहेगा। साथ ही कांजी हाउस में मवेशियों को रखने तथा सड़कों से हटाने के लिए कर्मचारियों की तैनाती की जा रही है। हालांकि स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मौजूदा प्रयास समस्या की गंभीरता की तुलना में पर्याप्त नहीं हैं।

नागरिकों ने प्रशासन से स्थायी और प्रभावी समाधान की मांग करते हुए नियमित नसबंदी, टीकाकरण अभियान, आवारा पशुओं की सतत निगरानी तथा पशुपालकों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो सड़क हादसों और डॉग बाइट की घटनाओं में और वृद्धि हो सकती है। विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि आवारा पशुओं और कुत्तों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें तथा किसी भी डॉग बाइट की स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें। डॉग बाइट की रोकथाम और आवश्यक सावधानियों से संबंधित जानकारी राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) – डॉग बाइट एवं रेबीज जानकारीhttps://ncdc.mohfw.gov.in?utm_source=chatgpt.com

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan