रायपुर। छत्तीसगढ़ी संगीत जगत को सोमवार को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब प्रदेश के पहले रैप सिंगर माने जाने वाले चेतन चांडक उर्फ एप्पी राजा का रायपुर एम्स में इलाज के दौरान निधन हो गया। लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे एप्पी राजा ने अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर समेत पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर प्रशंसकों, कलाकारों और शुभचिंतकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। अपनी अनोखी रैप शैली और छत्तीसगढ़ी संस्कृति को आधुनिक संगीत से जोड़ने के प्रयासों के कारण एप्पी राजा ने युवाओं के बीच अलग पहचान बनाई थी।
साल 1994 में नवागढ़ में जन्मे चेतन चांडक का जीवन संघर्षों से भरा रहा। उनके माता-पिता मूल रूप से राजस्थान के जैसलमेर के निवासी थे, जो बेहतर रोजगार की तलाश में पहले छत्तीसगढ़ के बेमेतरा और फिर नवागढ़ आकर बस गए। चेतन के शुरुआती दिन दुर्ग में बीते, जहां उन्होंने प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 2002 में पूरा परिवार कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर आ गया। आर्थिक तंगी के बावजूद चेतन ने पढ़ाई जारी रखी और रोजाना भानुप्रतापपुर से कांकेर तक सफर कर शिक्षा हासिल की। सीमित संसाधनों के बीच भी उन्होंने संगीत के प्रति अपने जुनून को कभी कम नहीं होने दिया।
बताया जाता है कि स्कूल के दिनों में ही चेतन ने अपना पहला रैप लिखा था और धीरे-धीरे अपनी अलग शैली के कारण लोगों के बीच लोकप्रिय होने लगे। ‘टूरा भोको लोलो’ जैसे गीतों ने उन्हें प्रदेशभर में पहचान दिलाई। संघर्ष के दौर में आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने सूरत की एक कपड़ा दुकान में भी काम किया, लेकिन संगीत के प्रति उनका लगाव लगातार बना रहा। उन्होंने सिर्फ मनोरंजन तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और शहीद भगत सिंह जैसे प्रेरणादायक व्यक्तित्वों पर भी रैप तैयार किए, जिन्हें लोगों ने सराहा। एप्पी राजा का जाना छत्तीसगढ़ी संगीत जगत के लिए ऐसी क्षति माना जा रहा है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में आसान नहीं होगी। उनके गीतों और रचनात्मकता ने प्रदेश की नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा और स्थानीय संस्कृति से जोड़ने का काम किया। एप्पी राजा से जुड़ी अधिक जानकारी और अपडेट के लिए उनका आधिकारिक सोशल मीडिया पेज देखा जा सकता है: Appy Raja Official







