रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर को झकझोर देने वाले हाईप्रोफाइल ड्रग्स रैकेट में अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एंट्री हो गई है। मुख्य आरोपी नाव्या मलिक के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किए जाने के बाद जांच की दिशा अब केवल नशीले पदार्थों की तस्करी तक सीमित नहीं रही, बल्कि इस पूरे नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेनदेन और काले धन के स्रोतों की भी गहन पड़ताल शुरू हो गई है। ईडी ने स्थानीय पुलिस से इस मामले की चार्जशीट, आरोपियों के बयान, मोबाइल डेटा और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जानकारी मांगी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ड्रग्स के कारोबार से अर्जित रकम को किस तरह वैध बनाने की कोशिश की गई।
पुलिस की शुरुआती जांच में नाव्या मलिक के मोबाइल फोन से करीब 850 ऐसे लोगों के नाम सामने आने का दावा किया गया था, जिनमें शहर के कई रसूखदार परिवारों के सदस्य, बड़े कारोबारी, होटल संचालक और प्रभावशाली लोग शामिल बताए जा रहे हैं। ईडी की औपचारिक जांच शुरू होने के बाद इन लोगों के बीच हलचल बढ़ गई है। केंद्रीय एजेंसी अब संदिग्ध बैंक खातों, यूपीआई ट्रांजेक्शन, निवेश और अघोषित संपत्तियों की जांच कर सकती है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि वित्तीय लेनदेन की कड़ियां जुड़ती हैं तो इस मामले में कई नए नाम सामने आ सकते हैं और कार्रवाई का दायरा भी बढ़ सकता है।
साल 2025 में इस रैकेट का खुलासा होने के बाद रायपुर के हाईप्रोफाइल सामाजिक दायरे में संचालित नशे के कारोबार की परतें खुली थीं। जांच में सामने आया था कि कटोरा तालाब क्षेत्र की रहने वाली नाव्या मलिक ने पूरे नेटवर्क को डिजिटल माध्यम से संचालित करने की व्यवस्था बना रखी थी। नशीले पदार्थों की खरीद-बिक्री और आपूर्ति के लिए एनक्रिप्टेड मोबाइल एप्लीकेशन, सीक्रेट चैट और कोड वर्ड का इस्तेमाल किया जाता था। चुनिंदा पार्टियों और बंद कमरों में आयोजित आयोजनों के जरिए वीआईपी ग्राहकों तक प्रतिबंधित पदार्थ पहुंचाए जाते थे। मुंबई में करीब 30 घंटे तक चली घेराबंदी और पूछताछ के बाद पुलिस को इस नेटवर्क के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली थी।
मामले के कुछ प्रमुख आरोपी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं, लेकिन ईडी की जांच शुरू होने के बाद उनके सामने कानूनी चुनौतियां फिर बढ़ सकती हैं। मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में आर्थिक अपराधों की जांच अलग स्तर पर होती है और यदि अवैध कमाई के सबूत सामने आते हैं तो आरोपियों की संपत्तियां भी जांच के दायरे में आ सकती हैं। फिलहाल एजेंसियां पूरे नेटवर्क के वित्तीय और डिजिटल पहलुओं को जोड़कर यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस हाईप्रोफाइल ड्रग्स सिंडिकेट की जड़ें कितनी गहरी हैं और इसके पीछे किन प्रभावशाली लोगों की भूमिका रही है।
इस मामले से जुड़ी आधिकारिक जानकारी और ईडी से संबंधित अपडेट के लिए भारत सरकार की एजेंसी की वेबसाइट प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।https://enforcementdirectorate.gov.in?utm_source=chatgpt.com







