छत्तीसगढ़। मॉनसून की शुरुआत के साथ ही छत्तीसगढ़ और झारखंड के ग्रामीण इलाकों में जंगलों से मिलने वाले पुटू (रुगड़ा) की मांग तेजी से बढ़ गई है। सीमित समय के लिए उपलब्ध होने और स्वाद के साथ पोषण से भरपूर होने के कारण इसकी कीमतें भी बाजार में लगातार ऊंची बनी हुई हैं। स्थानीय हाट-बाजारों में इन दिनों पुटू की अच्छी आवक देखने को मिल रही है, लेकिन विशेषज्ञों और वन क्षेत्रों से जुड़े जानकारों का कहना है कि खरीदारों को सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि पुटू जैसी दिखने वाली कई जंगली मशरूम प्रजातियां जहरीली भी होती हैं। ऐसे मशरूम का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
प्राकृतिक रूप से उगने वाला पुटू वर्ष में केवल एक बार, जुलाई और अगस्त के दौरान ही जंगलों में मिलता है। इसे कृत्रिम तरीके से खेतों या नियंत्रित वातावरण में उगाना संभव नहीं माना जाता। यह मुख्य रूप से साल (सखुआ) के पेड़ों की जड़ों के आसपास की नम और गीली मिट्टी में विकसित होता है। जब जमीन हल्की फटने लगती है और मशरूम बाहर निकलने लगता है, तब अनुभवी ग्रामीण इसे पहचानकर सावधानी से निकालते हैं। सीमित अवधि और विशेष स्थानों पर मिलने के कारण इसकी बाजार में उपलब्धता कम रहती है, जिससे इसकी कीमत सामान्य सब्जियों की तुलना में काफी अधिक होती है।
जानकारों के अनुसार असली पुटू की पहचान करना बेहद जरूरी है। खाने योग्य पुटू का बाहरी हिस्सा मिट्टी जैसा मटमैला या हल्का भूरा होता है, क्योंकि यह जमीन के भीतर विकसित होता है। इसे काटने पर अंदर का भाग पूरी तरह ठोस और सख्त दिखाई देता है तथा उसका रंग दूधिया सफेद या हल्का बादामी होता है। इसका आकार सामान्य मशरूम की तरह छतरीनुमा नहीं बल्कि गोल या अंडाकार गांठ जैसा होता है। इसके विपरीत यदि किसी मशरूम को काटने पर अंदर का हिस्सा स्पंज जैसा, जालीदार, पोला या चिपचिपा दिखाई दे, तो उसे बिल्कुल नहीं खरीदना चाहिए। इसी तरह बहुत अधिक चमकीले लाल, पीले या गहरे धब्बों वाले जंगली मशरूम भी विषैले हो सकते हैं और इनके सेवन से बचना चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जहरीले मशरूम का सेवन करने से पेट दर्द, उल्टी, दस्त और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे मामलों में समय पर उपचार न मिलने पर स्थिति गंभीर भी हो सकती है। इसलिए बाजार से पुटू खरीदते समय उसकी अच्छी तरह जांच करना और केवल भरोसेमंद स्थानीय विक्रेताओं या ऐसे ग्रामीणों से ही खरीदना उचित है जिन्हें जंगलों से इसे एकत्र करने का अनुभव हो। पकाने से पहले इसकी अच्छी तरह सफाई करना भी जरूरी है। वन क्षेत्रों में रहने वाले लोग वर्षों के अनुभव के आधार पर इसकी पहचान करते हैं, लेकिन नए खरीदारों को केवल कम कीमत देखकर खरीदारी करने से बचना चाहिए। प्राकृतिक खाद्य पदार्थों का आनंद तभी सुरक्षित है, जब उनकी सही पहचान और सावधानी के साथ उपयोग किया जाए। मशरूम की सुरक्षित पहचान और खाद्य प्रजातियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की आधिकारिक वेबसाइट https://icar.org.in पर भी देखी जा सकती है।







