कुरूद। जिले में मानसून की सक्रियता ने किसानों के चेहरों पर फिर से उम्मीद की मुस्कान लौटा दी है। एक जून से अब तक हुई वर्षा ने पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के औसत का 80 प्रतिशत से अधिक आंकड़ा पार कर लिया है। लगातार हुई बारिश का सबसे बड़ा असर महानदी परियोजना के प्रमुख जलाशयों पर देखने को मिला है, जहां गंगरेल, मुरूमसिल्ली, दूधावा और सोंढूर बांधों में जलस्तर तेजी से बढ़कर 74 प्रतिशत से अधिक लाइव स्टोरेज तक पहुंच गया है। इससे खरीफ सीजन के दौरान सिंचाई व्यवस्था मजबूत होने की संभावना बढ़ गई है और अल नीनो की आशंका के चलते चिंतित किसानों को बड़ी राहत मिली है। जल संसाधन विभाग के अनुसार सभी प्रमुख जलाशयों में लगातार पानी की आवक बनी हुई है और मानसून की स्थिति अनुकूल रहने पर आने वाले दिनों में जलभराव में और वृद्धि होने की संभावना है।
जिले में 10 जुलाई तक दर्ज वर्षा के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुरूद तहसील में 230.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य वर्षा का 78.2 प्रतिशत है। धमतरी तहसील में 240.8 मिमी यानी सामान्य वर्षा का 74.5 प्रतिशत रिकॉर्ड किया गया है। मगरलोड तहसील सबसे आगे रही, जहां 283.1 मिमी वर्षा के साथ सामान्य वर्षा का 98.2 प्रतिशत पूरा हो चुका है। कुकरेल में 252 मिमी यानी 89.6 प्रतिशत, बेलरगांव में 229.4 मिमी यानी 85.1 प्रतिशत तथा नगरी में 250.4 मिमी यानी 84.3 प्रतिशत वर्षा दर्ज की गई है। वहीं भखारा तहसील में अब तक 156.3 मिमी वर्षा हुई है, जो सामान्य वर्षा का 55.5 प्रतिशत है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जिले के अधिकांश हिस्सों में मानसून ने अच्छी शुरुआत की है और कृषि कार्यों को गति मिलने लगी है।
जल संसाधन विभाग द्वारा जारी प्रतिवेदन के अनुसार गंगरेल बांध का जलस्तर 347.75 मीटर के पूर्ण जलभराव स्तर के मुकाबले 343.75 मीटर तक पहुंच गया है तथा यहां 74.68 प्रतिशत लाइव स्टोरेज उपलब्ध है। मुरूमसिल्ली जलाशय का वर्तमान जलस्तर 423.21 मीटर दर्ज किया गया है, जहां लगभग 206.66 मिलियन घनमीटर अर्थात 72.74 प्रतिशत लाइव स्टोरेज उपलब्ध है। दूधावा जलाशय का जलस्तर 1388.48 मीटर दर्ज किया गया है और यहां लगभग 137.98 मिलियन घनमीटर पानी संग्रहित है। इसी प्रकार सोंढूर जलाशय का वर्तमान जलस्तर 468.30 मीटर तक पहुंच चुका है, जहां लगभग 137.89 मिलियन घनमीटर जल संग्रहित है। बीते 24 घंटों के दौरान सभी प्रमुख जलाशयों में पानी की आवक जारी रहने से जलस्तर में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि महानदी परियोजना के सभी प्रमुख बांधों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जलभराव की स्थिति और मानसून की प्रगति के आधार पर आवश्यकता पड़ने पर जल प्रबंधन संबंधी निर्णय लिए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून इसी तरह सक्रिय बना रहा तो खरीफ फसलों की सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और भूजल स्तर को भी इसका लाभ मिलेगा। मौसम और वर्षा से संबंधित अद्यतन जानकारी भारत मौसम विज्ञान विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) https://mausam.imd.gov.in?utm_source=chatgpt.com







