सेवाग्राम प्रोजेक्ट पर विधानसभा में बवाल, अजय चंद्राकर-भूपेश बघेल में तीखी बहस

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में नवा रायपुर स्थित सेवाग्राम प्रोजेक्ट को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। परियोजना पर हुए खर्च और इसके क्रियान्वयन को लेकर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने सरकार से जवाब मांगा, जिसके बाद सदन में माहौल गर्म हो गया। चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और अजय चंद्राकर के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। बहस का केंद्र बिंदु सेवाग्राम परियोजना पर हुए खर्च, प्रशासनिक प्रक्रिया और लोकधन के उपयोग को लेकर उठे सवाल रहे। विधानसभा की कार्यवाही के दौरान अजय चंद्राकर ने आरोप लगाया कि सेवाग्राम परियोजना में जनता के पैसे का दुरुपयोग हुआ है और निर्माण कार्य नियमों तथा निर्धारित प्रक्रियाओं से हटकर किया गया। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी एक परियोजना का मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन के पारदर्शी उपयोग और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा विषय है। उनके बयान के दौरान सदन में सत्ता और विपक्ष के सदस्यों के बीच कई बार तीखी बहस हुई और दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे।

विधायक के सवालों का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सदन को परियोजना का विस्तृत ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि नवा रायपुर में सेवाग्राम स्थापित करने का निर्णय तत्कालीन सरकार ने 10 मार्च 2022 को लिया था। परियोजना का उद्देश्य महात्मा गांधी के आत्मनिर्भर गांव की अवधारणा को आगे बढ़ाना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करना तथा स्थानीय कारीगरों और कलाकारों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराना था। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 से 2025 के बीच इस परियोजना के लिए बजट में लगभग 129 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था और स्वीकृत प्रक्रिया के तहत विभिन्न निर्माण कार्य किए गए। इस दौरान विपक्ष की ओर से परियोजना की कुल लागत और व्यय को लेकर भी सवाल उठाए गए, जिस पर सदन में विस्तृत चर्चा हुई।

बहस उस समय और तेज हो गई जब अजय चंद्राकर ने परियोजना के संचालन में “स्वेच्छाचारिता” शब्द का प्रयोग किया। इस टिप्पणी पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे अनुचित बताया। दोनों नेताओं के बीच कुछ समय तक तीखी नोकझोंक होती रही, जिसके कारण सदन का वातावरण गरमा गया। विधानसभा अध्यक्ष को भी बीच-बचाव करना पड़ा ताकि कार्यवाही सुचारू रूप से आगे बढ़ सके। चर्चा के दौरान यह भी कहा गया कि परियोजना के निर्माण के लिए किसी अलग विशेष प्रशासनिक ढांचे का गठन नहीं किया गया था और संबंधित विभागों के माध्यम से कार्य संपादित किए गए। हालांकि विपक्ष ने परियोजना की लागत, उपयोगिता और प्रक्रियागत पहलुओं पर विस्तृत जांच की मांग दोहराई। विधानसभा में हुई इस बहस ने एक बार फिर सार्वजनिक परियोजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और सरकारी धन के उपयोग को लेकर राजनीतिक विमर्श को तेज कर दिया है। सेवाग्राम परियोजना और विधानसभा की कार्यवाही से जुड़ी आधिकारिक जानकारी छत्तीसगढ़ विधानसभा की वेबसाइट https://cgvidhansabha.gov.in पर भी देखी जा सकती है।

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan