कुरूद। इंसानों की तरह बेजुबान पक्षियों को भी समय पर उपचार और देखभाल की जरूरत होती है। इसी संवेदनशीलता की मिसाल शुक्रवार को कुरूद के पशु चिकित्सालय में देखने को मिली, जहां करीब एक वर्ष उम्र के बीमार तोते को उपचार के लिए लाया गया। कुछ दिनों से तोते की तबीयत खराब होने के बाद उसका मालिक उसे लेकर पशु चिकित्सालय पहुंचा। चिकित्सकों ने पक्षी की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए उसकी बारीकी से जांच की और स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच के दौरान तोते में सर्दी और बुखार के लक्षण पाए गए, जिसके बाद चिकित्सकों ने आवश्यक उपचार करते हुए उसे एंटीबायोटिक दवा और मल्टीविटामिन सिरप दिया।
तोते के मालिक ने बताया कि कुछ दिनों से उसका पालतू पक्षी सामान्य नहीं था और उसकी हालत को देखते हुए वह उसे पशु चिकित्सालय लेकर आया। उपचार के साथ पशु चिकित्सकों ने पक्षी की देखभाल को लेकर जरूरी सुझाव भी दिए। उन्होंने सलाह दी कि तोते को स्वच्छ और सुरक्षित स्थान पर रखा जाए, उसे पर्याप्त आराम दिया जाए तथा उसके खान-पान और स्वास्थ्य में होने वाले किसी भी बदलाव पर लगातार नजर रखी जाए। चिकित्सकों ने यह भी स्पष्ट किया कि पक्षियों में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर घरेलू स्तर पर बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा देने के बजाय विशेषज्ञ से जांच कराना अधिक उचित है।
कुरूद के पशु चिकित्सालय में बेजुबान पक्षी के उपचार की यह घटना पशु स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लोगों की संवेदनशीलता को भी सामने लाती है। आमतौर पर पशु चिकित्सालयों में बड़े और पालतू पशुओं के उपचार के लिए लोग पहुंचते हैं, लेकिन पक्षियों और छोटे जीवों के स्वास्थ्य को लेकर भी समय पर चिकित्सकीय सलाह और उपचार जरूरी है। खासकर पालतू पक्षियों में खान-पान, साफ-सफाई, तापमान और रहने की जगह में बदलाव का सीधा असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। ऐसे में बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने की जरूरत है।
छत्तीसगढ़ शासन का पशुधन विकास विभाग पशु स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा सेवाओं से संबंधित योजनाओं एवं गतिविधियों का संचालन करता है। विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर पशु स्वास्थ्य, योजनाओं और विभागीय सेवाओं से जुड़ी जानकारी उपलब्ध है।
समय पर जांच और उपचार मिलने के बाद तोते के स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद जताई गई है। इस घटना ने यह संदेश भी दिया कि पशु-पक्षियों की बीमारी को लेकर लापरवाही न बरतते हुए जरूरत पड़ने पर उन्हें नजदीकी पशु चिकित्सालय तक पहुंचाना चाहिए। बेजुबान जीव अपनी तकलीफ बता नहीं सकते, इसलिए उनकी गतिविधियों, खान-पान और व्यवहार में होने वाले बदलाव पर ध्यान देना ही उनकी बीमारी को समय रहते पहचानने का महत्वपूर्ण माध्यम है।https://gaurela-pendra-marwahi.cg.gov.in/animal-husbandry/?utm_source=chatgpt.com







