कुरूद। नगर पंचायत कुरूद द्वारा लगभग 20 लाख रुपये की लागत से निर्मित अटल परिसर और उसमें स्थापित देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की आदमकद प्रतिमा इन दिनों बदइंतजामी और उपेक्षा का शिकार होती नजर आ रही है। परिसर के रखरखाव के अभाव में प्रतिमा के नीचे लगाया गया शिलालेख उखड़कर नीचे गिर गया है, जबकि पूरे परिसर में गंदगी फैली हुई है। इतना ही नहीं, प्रतिमा के आसपास उगी घास के कारण वहां आवारा मवेशियों का लगातार जमावड़ा लगा रहता है, जिससे परिसर की गरिमा प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस उद्देश्य से इस परिसर का निर्माण कराया गया था, वह जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के कारण पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है।
नगर पंचायत द्वारा वाटर फिल्टर प्लांट के समीप बनाए गए इस अटल परिसर का लोकार्पण 15 अगस्त 2025 को पूर्व केबिनेट मंत्री अजय चन्द्राकर ने किया था। उस अवसर पर उन्होंने इसे अपने सार्वजनिक जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों में से एक बताते हुए कहा था कि अपने नगर में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण करना उनके लिए गौरव की बात है। लोकार्पण के समय परिसर को सुव्यवस्थित और आकर्षक स्वरूप में तैयार किया गया था, लेकिन समय बीतने के साथ इसकी नियमित देखरेख नहीं होने से इसकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। प्रतिमा के आसपास उगी झाड़ियां और घास अब आवारा मवेशियों का ठिकाना बन चुकी हैं, जिससे परिसर की स्वच्छता और सम्मान दोनों पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों और अटल बिहारी वाजपेयी के समर्थकों का कहना है कि यह केवल एक प्रतिमा नहीं, बल्कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान का प्रतीक है। ऐसे स्मारकों की नियमित साफ-सफाई, मरम्मत और सुरक्षा सुनिश्चित करना नगर प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि समय रहते परिसर की देखरेख नहीं की गई तो इसकी स्थिति और अधिक खराब हो सकती है। लोगों का यह भी मानना है कि सार्वजनिक स्थलों का संरक्षण केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ऐसे स्थलों की स्वच्छता और गरिमा बनाए रखने के लिए जनसहभागिता भी आवश्यक है।
इस मामले में नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) महेन्द्र गुप्ता ने कहा कि उन्हें इस स्थिति की जानकारी नहीं थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की तत्काल जानकारी लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे और अटल परिसर की साफ-सफाई, शिलालेख की मरम्मत तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं शीघ्र दुरुस्त कराई जाएंगी। अब स्थानीय लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नगर पंचायत अपने आश्वासन पर कितनी तेजी से अमल करती है और अटल परिसर को उसकी गरिमा के अनुरूप फिर से व्यवस्थित कर पाती है।
अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन, योगदान और सार्वजनिक स्मारकों से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की वेबसाइट देखी जा सकती है: भारत सरकार – संस्कृति मंत्रालय







