रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में कुपोषण और एनीमिया जैसी गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए एक नई पहल की शुरुआत की है। महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से शुरू किए गए ‘घर-घर मुनगा, हर-घर मुनगा’ अभियान के तहत प्रदेशभर में बड़े पैमाने पर मुनगा (सहजन) के पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने इस अभियान को जनभागीदारी से जोड़ते हुए सभी जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों, नगरीय निकायों और आम नागरिकों से मानसून के दौरान अधिक से अधिक मुनगा के पौधे लगाने की अपील की है। सरकार का मानना है कि पोषण से भरपूर यह पौधा कुपोषण और एनीमिया के खिलाफ प्रभावी हथियार साबित हो सकता है।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों और त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों को पत्र लिखकर अभियान को सफल बनाने का आग्रह किया है। उन्होंने मुनगा को ‘मदर ट्री’ की संज्ञा देते हुए इसके पोषण और औषधीय महत्व पर विशेष जोर दिया है। विभागीय योजना के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों, शासकीय परिसरों, सार्वजनिक स्थलों और हितग्राहियों के घरों में मुनगा के पौधे लगाए जाएंगे। ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों को स्थानीय स्तर पर पौधरोपण की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि अभियान का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके। सरकार का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि लोगों को इसके नियमित उपयोग और पोषण संबंधी लाभों के प्रति जागरूक करना भी है।
पोषण विशेषज्ञों के अनुसार मुनगा की पत्तियां, फलियां और अन्य हिस्से प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, विटामिन ए और विटामिन सी जैसे आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। विशेष रूप से महिलाओं में एनीमिया और बच्चों में कुपोषण की समस्या को कम करने में इसका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से उगने वाला यह पौधा कम लागत में बेहतर पोषण उपलब्ध कराने का एक प्रभावी माध्यम बन सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी इसे दैनिक आहार का हिस्सा बनाने की सलाह देते रहे हैं। मुनगा के पोषण संबंधी वैज्ञानिक तथ्यों और उपयोगिता की जानकारी राष्ट्रीय पोषण संस्थान (ICMR-NIN) पर भी उपलब्ध है।https://www.nin.res.in?utm_source=chatgpt.com
राज्य में कुपोषण और एनीमिया लंबे समय से चिंता का विषय रहे हैं। ऐसे में सरकार की यह पहल स्वास्थ्य और पोषण सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पौधरोपण से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेंगे। इसके लिए लोगों को मुनगा के सेवन, संरक्षण और उपयोग के प्रति जागरूक करना भी उतना ही आवश्यक होगा। यदि पौधरोपण के साथ प्रभावी जनजागरूकता अभियान और नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाती है, तो यह योजना आने वाले वर्षों में प्रदेश के पोषण स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। अब देखना होगा कि यह अभियान कागजी योजनाओं से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव छोड़ पाता है और कुपोषण के खिलाफ चल रही लड़ाई में कितना कारगर साबित होता है।







