शनिवार को स्कूल टाइमिंग बदली, गर्मी के बीच बढ़ा विवाद

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शनिवार की कक्षाओं के समय में किए गए बदलाव को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी नए शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार अब शनिवार को भी कई स्कूलों में सामान्य कार्यदिवस की तरह नियमित समय तक कक्षाएं संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस निर्णय के बाद प्रदेशभर के शिक्षकों, अभिभावकों और शिक्षा से जुड़े संगठनों के बीच असंतोष का माहौल बन गया है। खासकर भीषण गर्मी और उमस के दौर में बच्चों को पूरे दिन स्कूल में रखने के फैसले पर सवाल उठाए जा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि अचानक किए गए इस बदलाव से पहले से तय शैक्षणिक गतिविधियों और विद्यालयी व्यवस्थाओं पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2018 में राज्य शासन ने एक स्थायी व्यवस्था लागू करते हुए शनिवार को स्कूलों का संचालन सुबह की पाली में करने का निर्णय लिया था। इसके तहत अधिकांश स्कूलों में सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक कक्षाएं लगती थीं। इस व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ खेलकूद, योग, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अन्य सह-शैक्षणिक गतिविधियों के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध कराना था। हालांकि नए शैक्षणिक कैलेंडर में शनिवार को भी सामान्य दिनों की तरह विद्यालय संचालन का प्रावधान किए जाने से शिक्षकों और विद्यार्थियों की दिनचर्या प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि इस बदलाव से राज्य सरकार की ‘बैगलेस डे’ जैसी पहल भी प्रभावित हो सकती है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना है।

शिक्षक प्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के समक्ष भी उठाया है और पुराने आदेश को यथावत रखने की मांग की है। उनका तर्क है कि प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान लगातार ऊंचा बना हुआ है और ऐसे में बच्चों को शाम तक विद्यालय में रोकना स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां बढ़ा सकता है। साथ ही खेलकूद, योग और रचनात्मक गतिविधियों के लिए मिलने वाला समय भी कम हो जाएगा। दूसरी ओर विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शैक्षणिक कैलेंडर विद्यार्थियों के हित और पाठ्यक्रम के प्रभावी संचालन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। हालांकि शिक्षकों का मानना है कि इस तरह के महत्वपूर्ण बदलावों से पहले मैदानी स्तर पर सुझाव और फीडबैक लेना जरूरी था।

फिलहाल इस मामले में अंतिम निर्णय को लेकर सभी की निगाहें स्कूल शिक्षा विभाग और मंत्री स्तर पर होने वाली चर्चा पर टिकी हैं। यदि आवश्यक हुआ तो विभाग संशोधित निर्देश जारी कर सकता है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शैक्षणिक निर्णय में विद्यार्थियों की सुविधा, स्वास्थ्य और सीखने की गुणवत्ता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। स्कूल शिक्षा विभाग की आधिकारिक जानकारी और आदेशों के लिए राज्य सरकार की वेबसाइट https://eduportal.cg.nic.in पर भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan