हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, जेल में बंद छात्र देगा नीट परीक्षा

रायपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने शिक्षा के अधिकार और छात्र के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने रायपुर केंद्रीय जेल में बंद एक विचाराधीन कैदी छात्र को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) 2026 में शामिल होने की अनुमति प्रदान की है। इस मामले में सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की एकल पीठ ने रायपुर पुलिस अधीक्षक और जेल अधीक्षक को निर्देश दिया है कि छात्र को निर्धारित परीक्षा केंद्र तक पूरी सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस अभिरक्षा में ले जाया जाए तथा परीक्षा समाप्त होने के बाद सुरक्षित रूप से वापस जेल पहुंचाया जाए। अदालत के इस आदेश को शिक्षा और न्यायिक संवेदनशीलता के संतुलन के रूप में देखा जा रहा है।

मामले के अनुसार संबंधित छात्र वर्तमान में एक आपराधिक प्रकरण में न्यायिक रिमांड पर रायपुर केंद्रीय जेल में बंद है। उसके खिलाफ खमतराई थाना क्षेत्र में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 108 के तहत अपराध दर्ज किया गया है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि पुलिस द्वारा अब तक इस मामले में आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने छात्र के शैक्षणिक हितों को प्रभावित न होने देने की आवश्यकता महसूस की। छात्र की ओर से अधिवक्ता अनुकूल विश्वास ने अंतरिम आवेदन प्रस्तुत कर बताया कि उनका मुवक्किल नीट 2026 परीक्षा के लिए पात्र है और उसका परीक्षा केंद्र रायपुर स्थित केंद्रीय विद्यालय निर्धारित किया गया है। अधिवक्ता ने छात्र का प्रवेश पत्र भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि यदि उसे परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई तो उसका एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक वर्ष प्रभावित हो जाएगा।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को केवल आरोप लंबित होने के आधार पर शिक्षा और प्रतिस्पर्धी परीक्षा में भाग लेने के अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने आदेश दिया कि 21 जून को परीक्षा शुरू होने से पूर्व छात्र को पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के साथ परीक्षा केंद्र पहुंचाया जाए और परीक्षा के दौरान आवश्यक निगरानी रखी जाए। परीक्षा समाप्त होने के बाद उसे तत्काल वापस केंद्रीय जेल लाया जाएगा। इसके साथ ही अदालत ने छात्र को परीक्षा की तैयारी के लिए जेल परिसर में आवश्यक अध्ययन सामग्री, गाइड, पुस्तकें और नोट्स रखने की अनुमति भी प्रदान की है, ताकि वह अपनी तैयारी जारी रख सके।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश उन मामलों में महत्वपूर्ण उदाहरण साबित हो सकता है, जहां विचाराधीन कैदियों के शैक्षणिक अधिकारों और व्यक्तिगत विकास के अवसरों का प्रश्न सामने आता है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तीन सप्ताह बाद की तिथि निर्धारित की है तथा आदेश की प्रति संबंधित निचली अदालत, रायपुर पुलिस प्रशासन और जेल प्रबंधन को तत्काल भेजने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय के इस निर्णय ने यह संदेश भी दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान किसी व्यक्ति के मौलिक और शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। मामले से संबंधित न्यायिक जानकारी और उच्च न्यायालय की गतिविधियों की जानकारी छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय पर देखी जा सकती है।https://highcourt.cg.gov.in?utm_source=chatgpt.com

Annu Dewangan
Author: Annu Dewangan